22वें शंघाई शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी से द्विपक्षीय वार्ता में बोले पुतिन, रूस की परंपरा है जन्मदिन की अग्रिम बधाई तो नहीं दूंगा

22वें शंघाई शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी से द्विपक्षीय वार्ता में बोले पुतिन, रूस की परंपरा है जन्मदिन की अग्रिम बधाई तो नहीं दूंगा
16-09-2022 - 07:23 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

उजबेकिस्तान के समरकंद शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 22वें शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन आज शुक्रवार 16 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में युक्रेन-रूस युद्ध के अलावा कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई और पुतिन ने मोदी को रूस आने के लिए न्यौता भी दिया।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि उन्हें जानकारी है, कल 17 सितंबर को उनका (मोदी का) जन्मदिन है। पुतिन ने कहा कि रूस की परंपराओं के अनुसार वे जन्म से पूर्व उन्हें शुभकामनाएं नहीं देंगे। उन्होंने कहा, 'मेरे दोस्त, कल आप अपना जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। रूसी परंपराओं के अनुसार हम कभी पहले से बधाई नहीं देते इसलिए फिलहाल मैं यह नहीं कर सकता। लेकिन, मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि हमें इस बारे में जानकारी है। हम आपको और मित्र देश भारत को ढेरों शुभकामनाएं देना चाहते हैं। हम आपके नेतृत्व में भारत की समृद्धि की कामना करते हैं।' पुतिन ने पीएम मोदी से यह भी कहा कि मैं यूक्रेन संघर्ष पर आपकी स्थिति और चिंताओं के बारे में जानता हूं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि यह सब जल्द से जल्द खत्म हो। वहां क्या हो रहा है, हम आपको इसकी जानकारी मुहैया कराते रहेंगे।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा कि मैं आपका और यूक्रेन का आभारी हूं क्योंकि संकट में फंसे हमारे हजारों विद्यार्थी दोनों देशों की मदद से ही बाहर निकल पाए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने कई बड़ी समस्याएं हैं, खासकर विकासशील देशों के सामने, जिनमें खाद्य सुरक्षा, ईंधन सुरक्षा, उर्वरक शामिल हैं और हमें इनसे निपटने के लिए रास्ते निकालने होंगे

इससे पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन से मुलाकात की। भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय से किये गये ट्वीट में बताया गया है कि पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन से अलग एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने इस बैठक में कई क्षेत्रों में द्विपक्षी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

उल्लेखनीय है कि तुर्की हमेशा से पाकिस्तान का सहयोग करता रहा है और पाकिस्तान उसे सऊदी अरब से भी बड़ा मित्र मानता है। पाकिस्तान के कारण भारत और तुर्की के संबंधों में अक्सर तनाव बना रहता है। यह तनाव तब और बढ़ गया था जब उसने कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे को लेकर भारत के विरुद्ध और पाकिस्तान के समर्थन में टिप्पणी की थी। इसके विपरीत पाकिस्तान का सहयोगी रहे सऊदी अरब ने इस मामले पाकिस्तान का साथ नहीं दिया तो पाकिस्तान को तुर्की की नजदीकियां और बढ़ गईं। अब उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी तुर्की राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बैठक के बाद इस दोनों के बीच तनाव में कमी देखने को मिले।

इससे पूर्व पीएम मोदी ने बैठक में अफगानिस्तान को मदद पहुंचाने में पाकिस्तान की ओर रोड़ा लगाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को एक दूसरे को ट्रांजिट का अधिकार देना चाहिए। जवाब में शरीफ ने कहा कि हमें एक मजबूत कनेक्टिविट प्लान बनाना चाहिए, जिसमें मध्य एशिया के देशों की कनेक्टिविटी हो। ऐसे में पड़ोसी समेत सभी को पूरा ट्रांजिट का अधिकार मिल जाएगा।  

ध्यान दिला दें कि एससीओ में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान इसमें हिस्सा ले रहे हैं। सहयोगी के रूप में कई अन्य देश भी इस सम्मिट में मौजूद रहे। यह सम्मिट अगले वर्ष भारत में होगा और वही इसकी अध्यक्षता भी करेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।