निस्वार्थ प्रेम के प्रतीक संत वैलेंटाइन ने अपनी आंखें दान कर दिया था प्रेम का सन्देश.!
<p>वेलेंटाइन डे, अब भारत में भी हर साल मनाया जाने लगा हैं लेकिन क्या आपको जानते हैं कि वेलेंटाइन डे मनाने की परंपरा कहां से आई ? यह इतना लोकप्रिय क्यों बन गया? क्या यह हमेशा प्यार,निस्वार्थ भाव और अच्छी भावनाओं के बारे में था? समाज में संत वेलेंटाइन ने ऐसा क्या किया था ,जो वो प्रेम की परिभाषा हो बन गए। वेलेंटाइन डे से जुड़ी कहानी किताब 'ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन' में हमें संत वेलेंटाइन का ज़िक्र हमें मिलता है। इस को जानने के लिए हमें रोम के इतिहास की तीसरी शताब्दी में जाना पड़ेगा। </p> <p><br /> </p>
भारत की बात करें तो यहां प्रभु श्रीराम के जन्म लेने, रामसेतु के होने को लेकर और अब इन दिनों तो तुलसीदासकृत रामचरिच मानस पर भी प्रश्व उठाये जाने लगे हैं। लेकिन, सवाल यह है कि क्या इतिहास को वर्तमान की कसौटी पर परखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि संत वेलेंटाइन और वेलेंटाइन डे से जुड़ी किताब 'ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन' में जो लिखा गया है, उस पर विश्वास किया जाये या नहीं यह पाठकों पर ही निर्भर है। इस किताब की बात मानें तो संत वेलेंटाइन ने उस दौर में कुछ ऐसा कर दिया था कि जिसकी वजह से वे निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक बन गये।
विवाह न करने के आदेश का किया था विरोध संत वेलेंटाइन ने
इस किताब के मुताबिक रोम का सम्राट क्लॉडियस, जिसका तीसरी शताब्दी में शासन था, उस का मानना था कि विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि में कमी आ जाती है इसलिए उसे आदेश जारी किया कि उनका कोई भी सैनिक और अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया। उन्होंने लोगो को प्रेम और विवाह के लिए प्रेरित किया, उनके इस आह्वान से प्रभावित होकर लोगों,अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए।
जेल में बंद करने वाले की बेटी को किया था नेत्रदान
बिशप वेलेंटाइन ने भी क्लॉडियस की इच्छा के खिलाफ जा कर गुप्त शादी कर ली। इसके लिए वेलेंटाइन को जेल भेज दिया गया। जेल में रहते हुए उन्होंने निःस्वार्थ भाव से जेलर की नेत्रहीन बेटी 'जैकोबस' की आंखें ठीक कर दीं। कहा तो जाता है संत वेलेंटाइन ने नेत्रदान किया और जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था 'तुम्हारा वेलेंटाइन'।
सम्राट ने दी थी 14 फरवरी को फांसी
आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी के दिन ही, संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। और तभी से उनकी याद में इस दिन को निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाने लिए मनाया जाता है।
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