Hindenburg Report : दूध का दूध, पानी का पानी... हिंडनबर्ग का एजेंडा फुस्स कर अडानी ने जीता दुनिया का भरोसा, मूडीज-फिच ने भी दी गुड न्यूज
<p><em><strong>Hindenburg Report : मंगलवार को अडानी के शेयरों में तेजी के बाद अब रेटिंग एजेंसियों मूडीज और फिच ने भी अडानी पर अपना भरोसा कायम रखते हुए समूह के लोन को लेकर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लोन इतना अधिक नहीं है कि उनकी ऋण गुणवत्ता पर किसी तरह का जोखिम पैदा हो।</strong></em></p> <quillbot-extension-portal></quillbot-extension-portal>
Hindenburg Report : अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के कारण अडानी को पिछले आठ कारोबारी दिनों में काफी नुकसान हुआ। उनकी आधी संपत्ति लगभग गिर गई, लेकिन अब वो कमबैक कर रहे है। अडानी के शेयरों में तेजी देखने को मिल रही है। वहीं, अब रेटिंग एजेंसियों मूडीज और फिच ने अडानी समूह के लोन को लेकर अपनी रिपोर्ट दी है। दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसियों फिच और मूडीज ने मंगलवार को कहा कि अडानी समूह की कंपनियों द्वारा भारतीय बैंकों से लिया गया लोन इतना अधिक नहीं है कि उनकी ऋण गुणवत्ता पर किसी तरह का जोखिम पैदा हो।
हिंडनबर्ग ने हिलाया साम्राज्य
रेटिंग एजेंसियों फिच और मूडीज ने मंगलवार को कहा कि अडाणी समूह की कंपनियों को भारतीय बैंकों की तरफ से दिया गया कर्ज इतना अधिक नहीं है कि उनकी ऋण गुणवत्ता पर किसी तरह का जोखिम पैदा हो। इसके साथ ही दोनों रेटिंग एजेंसी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बैंकों को असाधारण सरकारी समर्थन मिलने की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए बैंक रेटिंग निर्धारित की जाती हैं। अमेरिकी निवेश शोध फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की प्रतिकूल रिपोर्ट आने के बाद से अडानी समूह के शेयरों में तगड़ी गिरावट आई है। इसकी वजह से भारतीय बैंकों के समूह को दिए गए कर्ज को लेकर भी आशंका जताई जाने लगी है।
क्या कहा है रेटिंग एजेंसियों ने
फिच रेटिंग्स ने इस संदर्भ में अपनी एक टिप्पणी में कहा कि अडाणी समूह को भारत के बैंकों का कर्ज अपने-आप में इतना अधिक नहीं है कि बैंकों के ऋण प्रोफाइल को किसी तरह का ठोस जोखिम पैदा हो सके। उसने कहा कि बैंकों की रेटिंग इस उम्मीद पर आधारित होती है कि उन्हें कर्ज फंसने की स्थिति में जरूरत पडने पर असाधारण सरकारी समर्थन मिल जाएगा। फिच ने कहा कि अगर अडाणी समूह के बड़े हिस्से के दबाव में आने की काल्पनिक स्थिति में भी भारतीय बैंकों का कर्ज जोखिम प्रबंधन-योग्य होगा और इन बैंकों की व्यवहार्यता रेटिंग पर भी उसका कोई प्रतिकूल परिणाम नहीं होगा।
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