जिस बात से डर रहा था अमेरिका, वही हो गया..! सऊदी अरब ने साइन की जासूसी के लिए बदनाम चीनी कंपनी हुवावे से डील
<p><em><strong>तीन दिन के सऊदी अरब दौरे पर गए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) के साथ मिलकर अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दे दिया है। अमरीकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन की एडमिनिस्ट्रेशन जिस डील से डर रही थी, चीन और सऊदी अरब ने वही साइन कर ली।</strong></em></p>
चीन की हुवावे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी अब सऊदी अरब में सर्विस देगी। यह कंपनी 5जी नेटवर्क के बहाने दूसरे देशों में जासूसी के लिए बदनाम है। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने हुवावे के लिए दरवाजे बंद रखे हैं। कुछ देश तो ऐसे हैं, जिन्होंने डील तक पहुंचने के बाद आखिरी वक्त पर इससे किनारा कर लिया।
जिनपिंग की सऊदी यात्रा के दौरान अब तक चीन और सऊदी अरब के बीच 30 अरब डॉलर के 20 व्यापार समझौते साइन हुए हैं। इसके अलावा कुछ समझौतों को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही है।
हुवावे के साथ डील पर हस्ताक्षर भले ही एमबीएस के पिता और किंग सलमान ने किए हों लेकिन पर्दे के पीछे रोल क्राउन प्रिंस सलमान यानी एमबीएस का ही है। हाल के महीनों में सऊदी और अमेरिका के रिश्ते खराब रहे हैं। यही वजह है कि बुजुर्ग किंग के सुधारवादी बेटे ने देश के लिए नये विकल्प तलाशे। चीन से इतने समझौते हकीकत में अमेरिका को सख्त मैसेज है। सऊदी यह साफ कर देना चाहता है कि वो अब सिर्फ अमेरिका के भरोसे नहीं रहेगा।
सऊदी और चीन के बीच गुरुवार रात स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की डील भी हुई। जिनपिंग को रियाद में ग्रैंड वेलकम मिला। पहले उनके प्लेन और बाद में कार को रॉयल गार्ड्स ने एस्कॉर्ट किया। हर जगह सऊदी और चीन के फ्लैग नजर आए।
सऊदी में हुवावे से क्यों परेशान अमेरिका
जानकारी मुताबिक, हुवावे सऊदी में क्लाउड कम्प्यूटिंग बेस्ड हाईटेक कॉम्पलेक्स बनाएगी। इसके अलावा 5जी नेटवर्क का विस्तार करेगी। माना जा रहा है कि सऊदी-चीन डील कराने में पर्दे के पीछे रूस का भी हाथ है।
अमेरिका के गल्फ स्टेट्स में कई मिलिट्री और एयरबेस हैं। बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन को शक है कि चीन गल्फ में पैर पसारकर अमेरिका के तमाम सैन्य ठिकानों की जासूसी करेगा। देखने वाली बात यह होगी कि सऊदी-हुवावे डील के बाद अमेरिका किस तरह रिएक्ट करेगा। यह डील गुरुवार रात ही हुई है। जाहिर है अमेरिका, नाटो और दूसरे देशों ने अब तक इस पर रिएक्शन इसलिए नहीं दिया है क्योंकि डील की डीटेल्स सामने नहीं आ सकी हैं।
अमेरिका के पास कई रास्ते
अमेरिका के पास ऐसे कई रास्ते हैं, जिनके जरिए वो सऊदी अरब को आसानी से सबक सिखा सकता है। खासतौर से सऊदी फौज के पास 75 प्रतिशत उपकरण और हथियार अमेरिकी हैं। इंटेलिजेंस के मामले में भी उसका यहां एकतरफा दबदबा है।
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