अदालत ऐसी जगह नहीं जहां... सुप्रीम कोर्ट से पार्टी को फटकार
<p><strong><em>शीर्ष अदालत ने एक राजनीतिक दल की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें दावा किया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि कुछ कंपनियों का नियंत्रण होता है।</em></strong></p>
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि अदालत ऐसी जगह नहीं है, जहां हर कोई प्रचार पाने के लिए आ जाए। शीर्ष अदालत ने एक राजनीतिक दल की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें दावा किया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि कुछ कंपनियों का नियंत्रण होता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव प्रक्रिया की निगरानी निर्वाचन आयोग करता है और EVM का इस्तेमाल दशकों से चुनावों में किया जा रहा है।
इस पार्टी पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ मध्य प्रदेश जन विकास पार्टी की ओर से हाई कोर्ट के पिछले साल दिसंबर के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर विचार कर रही थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि जिस दल को चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से मान्यता नहीं मिली है, वह याचिकाएं दायर करके मान्यता लेना चाहता है।’
पीठ ने कहा कि ईवीएम लंबे समय से इस्तेमाल में है, लेकिन समय-समय पर मुद्दों को उठाने की मांग की जाती रही है। याचिकाकर्ता दल की ओर से पेश वकील ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला दिया, जिसके तहत चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण से संबंधित दायित्व चुनाव आयोग में निहित होता है।
याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि यद्यपि अनुच्छेद 324 कहता है कि सब कुछ चुनाव आयोग द्वारा नियंत्रित किया जाएगा, लेकिन ईवीएम को कुछ कंपनियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। पीठ ने कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि पूरे देश में संसदीय चुनावों में कितने लोग मतदान करते हैं? यह एक बड़ी कवायद है।’
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