केरल हाईकोर्ट ने SIR स्थगन से किया इनकार, विपक्ष को बड़ा झटका
केरल में विपक्ष की ‘एंटी-SIR’ मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें स्थानीय निकाय चुनाव पूरे होने तक राज्य में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की गई..
तिरुअनंतपुरम। केरल में विपक्ष की ‘एंटी-SIR’ मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें स्थानीय निकाय चुनाव पूरे होने तक राज्य में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की गई थी।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति वी.जी. अरुण ने कहा कि अन्य राज्यों में SIR के खिलाफ दायर याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और ऐसे में “न्यायिक अनुशासन और सौहार्द के तहत इस अदालत को ऐसी याचिका सुनने से परहेज़ करना चाहिए”।
उन्होंने अपने आदेश में लिखा: “उपरोक्त कारणों से यह रिट याचिका बंद की जाती है।”
हालाँकि, न्यायमूर्ति अरुण ने केरल सरकार को यह विकल्प खुला छोड़ दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जा सकती है या फिर सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के नतीजे के बाद हाईकोर्ट में दोबारा आ सकती है।
सरकार की दलील और अदालत की टिप्पणी
केरल सरकार ने कहा था कि वह SIR की वैधता को चुनौती नहीं दे रही, बल्कि सिर्फ यह चाहती है कि 21 दिसंबर को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव तक इस प्रक्रिया को टाल दिया जाए।
लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की अपनी व्याख्या कर केरल की याचिका स्वीकार करना उचित नहीं होगा।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है?
11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में DMK, CPI(M), कांग्रेस की बंगाल इकाई और टीएमसी ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR के खिलाफ याचिकाएँ दायर की हैं, जिनमें 27 अक्टूबर की चुनाव आयोग (EC) अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने..
- चुनाव आयोग से जवाब मांगने को कहा
- मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर निर्धारित की
- मद्रास और कलकत्ता हाईकोर्टों को संबंधित मामलों पर कार्यवाही रोकने का निर्देश दिया
इसके अलावा, अदालत ने AIADMK की उस हस्तक्षेप याचिका को सुनने की सहमति दी है जिसमें उसने SIR को चुनावों की पवित्रता बनाए रखने और वोटर फ्रॉड रोकने के लिए “जरूरी और वैध प्रक्रिया” बताया है। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले बिहार में SIR रोकने से इनकार कर चुका है।
SIR की राष्ट्रीय स्थिति
27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR के दूसरे चरण की घोषणा की थी, जो नवंबर से अगले वर्ष फरवरी तक चल रहा है।
इन 12 राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों में SIR चल रहा है:
अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
- तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव होने हैं।
- असम में भी 2026 में चुनाव हैं, लेकिन वहाँ SIR अलग से घोषित किया जाएगा।
दूसरा चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा।
ड्राफ्ट रोल 9 दिसंबर को जारी होंगे।
अंतिम वोटर सूची 7 फरवरी को प्रकाशित होगी।
SIR विवाद का केंद्र
DMK ने SIR को “संवैधानिक अतिक्रमण” बताते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के पास इसे लागू करने का अधिकार ही नहीं है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, जबकि EC इसे चुनावी पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताता है।
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