मौन हुई मुखर वाणी, अनंत में लीन विवादों के स्वरूपानंद सरस्वती?
द्वारका शारदापीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में उन्होंने अंतिम सांस ली। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पास बद्री आश्रम और द्वारकापीठ की जिम्मेदारी थी। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उनके बयानों को लेकर खूब चर्चा मिली।
राम मंदिर पर दिया था बयान
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के लिए पहुंचे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 6 फरवरी 2021 को मनकामेश्वर मंदिर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर नहीं बन रहा है। वहां आने वाले दिनों में विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय बनेगा।
किसान आंदोलन पर सुनाई थी खरी-खरी
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने किसान आंदोलन पर भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को हल निकालने का संदेश दिया था। नोटबंदी से लेकर किसान बिल तक को उन्होंने सरकार का एक पक्षीय फैसला करार दिया था।
कोरोना पर भी दिया था बयान
कोरोना संक्रमण को लेकर उन्होंने कहा था कि जहां पर भी दूषित खाना और दूषित जल है, वहां बीमारी का प्रसार हुआ है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना पर कहा कि केवल विभाग बना देने से काम नहीं चलेगा।
बेटियों को तर्पण का अधिकार देने के थे खिलाफ
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बेटियों को तर्पण का अधिकार दिए जाने के खिलाफ थे। एक बार उन्होंने कहा था कि लड़कियां अपने माता- पिता की संपत्ति पर अपना हक जताने के लिए उनका दाह संस्कार और पिंडदान करती हैं। लड़कियों के लिए ऐसे कर्मकांड हिंदू धर्म शास्त्रों के खिलाफ हैं।
पीएम मोदी पर साधा था निशाना
शंकराचार्य पीएम नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर खूब लेते थे। उन्होंने कहा था कि जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मूल स्वरूप को बिगाडऩे में लगे हुए हैं। आरएसएस के हिंदुओं की बात करने और ईद मिलन समारोह के आयोजन जैसे मसलों पर करारा हमला बोला था।
ताजमहल के नीचे शिवलिंग की कही थी बात
शंकराचार्य ने 2015 में आगरा में ताजमहल के नीचे शिवलिंग होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि ताजमहल के नीचे भगवान शिव का मंदिर है। इसे भक्तों के लिए खोला जाना चाहिए।
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