Pakistan Economy : जिन्ना के हिन्दुस्तान यानी पाकिस्तान में मची है त्राहि-त्राहि...! केले 450 रुपए दर्जन और प्याज 200 रुपए किलो, बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी सपना

<p><em><strong>पाकिस्तान की स्थिति दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। यहां पर महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब परिवारों के लिए दो वक्त के खाने का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। कई लोग तो अपने बच्चों को स्कूल से निकालने के लिए मजबूर हो रहे हैं।</strong></em></p>

Pakistan Economy : जिन्ना के हिन्दुस्तान यानी पाकिस्तान में मची है त्राहि-त्राहि...! केले 450 रुपए दर्जन और प्याज 200 रुपए किलो, बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी सपना
12-04-2023 - 10:58 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

आर्थिक संकट में घिरे पाकिस्तान में महंगाई उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां पर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना और अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाना लोगों के लिए सपना-सा होता जा रहा है। पाकिस्तान रुपए में हाल के दिनों में हुई गिरावट ने आर्थिक संकट को और बढ़ा दिया है। इस समय एक डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान रुपया 288 के स्तर पर पहुंच चुका है। रमजान के महीने में लोगों के पास रोजा तोड़ने के लिए जरूरी फल खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं। देश में केले 450 रुपए दर्जन, सेब 400 रुपए किलो और प्याज 200 रुपए किलो पर बिक रहा है।
आजादी के बाद सबसे बड़ा संकट
सन् 1947 में देश को आजादी मिली थी और तब से लेकर अब तक पाकिस्तान तीन बार तख्तापलट का सामना कर चुका है। चुनी हुई सरकारों को सत्ता से बेदखल करने वाले और सैन्य शासन का इतिहास रखने वाले इस मुल्क में आर्थिक स्थिति कभी इतनी खराब नहीं रही, जितनी कि इस समय है। नगदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई सालों से लगातार गिरावट की स्थिति में है।
जनता ने नेताओं को दिया दोष
लाहौर में एकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले नाजिम मलिक ने कहा, ‘महंगाई की वजह से मेरी सामान खरीदने की शक्ति खत्म हो चुकी है। वास्तव में, मैं जो कमाता हूं उससे दो वक्त का खाना भी मुमकिन नहीं है।’ पिछले छह महीनों के दौरान, मुद्रास्फीति उस स्तर पर पहुंच गई जहां उनकी सैलरी जो कि 65,000 पाकिस्तानी रुपए है, उसमें भी वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के लिए भोजन खरीदने में परेशानियों का सामना करते हैं।
आटे के बदले मिली मौत
देश में पिछले दो हफ्तों के दौरान मुफ्त भोजन या गेहूं पाने की कोशिश में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। 25,000 रुपए कमाने वाले शकील अहमद अकेले हैं और उनकी अभी फैमिली नहीं है। एक कैंटीन में काम करने वाले शकील भी महीने के पहले दो हफ्तों में जो कमाते हैं, वह सारा खर्च हो जाता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।