इंजीनियरिंग का अजूबा ! भूकंप से बेअसर होगा चिनाब रेलवे ब्रिज
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दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज का शनिवार, 13 अगस्त को शुभारंभ हुआ। इस पुल के साथ आजादी के बाद पहली बार श्रीनगर देश के बाकी हिस्से से जुड़ जाएगा। यह ब्रिज इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। चिनाब नदी पर बना यह पुल एफिल टावर (324 मीटर) से 35 मीटर ऊंचा है। इस ब्रिज को भूकंप और धमाकों का खतरा नहीं है। रणनीतिक लिहाज से भी यह काफी महत्वपूर्ण है। इस ब्रिज से ट्रेन के जरिए सेनाएं आसानी से आ-जा सकेंगी। इसका काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इसका निर्माण मुंबई की दिग्गज इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी एफकोन्स ने किया है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 28,000 करोड़ रुपये की लागत आई है।
इस पुल का निर्माण 2002 में शुरू हुआ था। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। सुरक्षा और अन्य कारणों से इसका काम 2008 में रोक दिया गया था। फिर 2010 में काम दोबारा चालू हुआ। अब यह बनकर तैयार हो गया है। दुनिया के सबसे ऊंचे इस सिंगल-आर्च रेलवे ब्रिज पर ओवरआर्क डेक का अंतिम टुकड़ा शनिवार को लॉन्च हुआ। इसे गोल्डन जॉइंट भी कहा जाता है। इसके जरिए सीधे ट्रेन से कश्मीर पहुंचा जा सकेगा। चिनाब रेलवे पुल जम्मू के कटरा और कश्मीर के बनिहाल के 111 किलोमीटर लंबे दुर्गम रास्ते को जोडऩे का काम करेगा।
न भूकंप हिला सकेगा न धमाके
इस ब्रिज का भूकंप भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यह रेल पुल 40 किलोग्राम टीएनटी (विस्फोटक) के धमाकों और रिक्टर स्केल पर आठ की तीव्रता वाले भूकंप को सहने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। यहां तक कि विस्फोट के बाद भी ट्रेन 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इस पर से गुजर सकती है।
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