कर्नाटक जाति सूची से ‘क्रिश्चियन’ संदर्भ हटाए गए: सीएम सिद्धारमैया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार की गई जातियों की ड्राफ्ट सूची से विवादित “क्रिश्चियन” शब्द को हटा दिया गया है..
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार की गई जातियों की ड्राफ्ट सूची से विवादित “क्रिश्चियन” शब्द को हटा दिया गया है।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह मैंने नहीं हटाया है। पिछड़ा वर्ग आयोग एक वैधानिक निकाय है। हम उसके निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हमने केवल दिशा-निर्देश दिए हैं, जिनका वे पालन कर रहे हैं।”
भाजपा के आरोपों पर कि यह सर्वेक्षण जातिगत विभाजन को बढ़ावा देगा, सिद्धारमैया ने कहा, “सरकार को लोगों की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति जाननी ही चाहिए। इसे जाने बिना हम आपके लिए नीतियां कैसे बना सकते हैं?”
पंचमसाली जगद्गुरु वचनानंद स्वामीजी द्वारा सर्वेक्षण को ‘साजिश’ बताने पर सीएम ने पलटवार करते हुए कहा, “1931 के बाद जाति सर्वेक्षण बंद हो गया था। अब केंद्र सरकार खुद कह रही है कि वह जाति जनगणना करेगी। तो क्या हम यह कहें कि इसमें भी कोई साजिश है? केंद्र की जाति जनगणना 2028 में होगी।”
यह कदम तब उठाया गया जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 16 सितंबर को सीएम को पत्र लिखकर जाति सूची में ‘क्रिश्चियन’ पहचानियों को हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान हो सकता है।
राज्यपाल ने कहा था कि भाजपा के सांसदों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला और ‘कुंभारा क्रिश्चियन’, ‘कुरुबा क्रिश्चियन’ जैसे जातिगत संदर्भों पर आपत्ति जताई। उन्होंने अवैध घुसपैठियों से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया।
इस पर सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी, “यह राज्यपाल ने नहीं कहा है। भाजपा राजनीति कर रही है। क्या मुझे हर बार उन्हें जवाब देते रहना चाहिए?”
इस बीच, बेंगलुरु में वोक्कालिगा समुदाय की बैठक हुई, जिसकी अगुवाई धार्मिक नेता निर्मलानंदनाथ स्वामीजी ने की। इस मंच पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी साथ बैठे।
बैठक में पूर्व सीएम डीवी सदानंद गौड़ा, भाजपा नेता सीटी रवि, आर. अशोक, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
कुमारस्वामी ने ट्वीट किया, “मैंने वोक्कालिगा समुदाय की सामाजिक-शैक्षिक सर्वेक्षण और जाति जनगणना 2025 पर जागरूकता बैठक में भाग लिया। वरिष्ठ नेताओं और संघ प्रतिनिधियों के साथ सर्वेक्षण के फायदे-नुकसान पर चर्चा हुई।”
डीके शिवकुमार ने भी बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए संकल्प प्रस्ताव के प्रति एकजुटता दिखाई।
निर्मलानंदनाथ स्वामीजी ने कहा, “वोक्कालिगाओं को क्रिश्चियन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हम सर्वेक्षण स्थगित करने की मांग करते हैं। हर वोक्कालिगा को धर्म में ‘हिंदू’ और जाति में ‘वोक्कालिगा’ लिखना चाहिए। उपजाति भी वोक्कालिगा ही दर्ज होनी चाहिए।”
बैठक के बाद कुमारस्वामी ने कहा, “कांग्रेस सरकार सामाजिक-शैक्षिक सर्वे के नाम पर जल्दबाजी में जाति जनगणना कर रही है। पहले कांताराज आयोग, फिर जयप्रकाश हेगड़े आयोग और अब तीसरा मधुसूदन नाइक आयोग। आखिर ये कौन से मानदंड पर काम कर रहे हैं? 15 दिन की रिपोर्ट अवधि में 9 दिन नवरात्रि के हैं। ऐसे में रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय होगी?”
उन्होंने चेतावनी दी, “अगर सरकार ने सर्वे में अन्याय किया तो अगली लड़ाई का खाका हम पहले ही तैयार कर चुके हैं। यह सरकार आग लगाने का काम कर रही है, नतीजे जल्द सामने आएंगे।”
वहीं, भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कहा—
“अगर वोक्कालिगा को क्रिश्चियन के रूप में दिखाया गया तो हम सड़कों पर उतरकर लड़ेंगे।”
कुमारस्वामी और शोभा करंदलाजे ने भी सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए विवाद भड़काने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर डीके शिवकुमार ने सुलह का रुख अपनाते हुए कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी ली है कि सभी समस्याओं का समाधान होगा। वोक्कालिगा समुदाय ने पहले ही बेंगलुरु में सबसे ज्यादा जमीन खोई है। हमें मिलकर अपने हितों की रक्षा करनी होगी।”
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