भारत ने यूक्रेन पर पश्चिमी देशों के राजनयिकों की टिप्पणी को किया खारिज, पुतिन आज रात दिल्ली पहुंचेंगे; उच्च स्तरीय शिखर बैठक पर नजर..
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले, भारत ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों द्वारा लिखे गए एक संयुक्त अख़बारी लेख पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारतीय अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि यह कदम “असामान्य” और “स्वीकार्य राजनयिक आचरण के अनुरूप नहीं” है..
नयी दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले, भारत ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों द्वारा लिखे गए एक संयुक्त अख़बारी लेख पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारतीय अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि यह कदम “असामान्य” और “स्वीकार्य राजनयिक आचरण के अनुरूप नहीं” है।
पश्चिमी देशों के इन दूतों ने अपने लेख में आरोप लगाया था कि पुतिन यूक्रेन में शांति प्रयासों में बाधा डाल रहे हैं। भारत का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी कूटनीतिक मर्यादा के विरुद्ध है और इसे निजी संवाद के माध्यम से उठाया जाना चाहिए था।
भारत की प्रतिक्रिया—युद्ध का समाधान बातचीत से ही संभव
अधिकारियों ने दोहराया कि यूक्रेन संघर्ष पर भारत की स्थिति स्पष्ट है—
- युद्ध का अंत युद्धक्षेत्र में नहीं हो सकता,
- टिकाऊ शांति का मार्ग संवाद और कूटनीति से ही निकलता है।
भारत ने यह भी कहा कि वह किसी भी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय पहल का समर्थन करेगा जो युद्ध रोकने में मदद करे, जिसमें अमेरिका द्वारा किए जा रहे प्रयास भी शामिल हैं।
पुतिन कल से भारत दौरे पर: समझौतों की लंबी सूची तैयार
राष्ट्रपति पुतिन गुरुवार से दो दिवसीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचेंगे। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर बैठक में व्यापक रणनीतिक सहयोग पर कई अहम समझौते होने की उम्मीद है। प्रमुख क्षेत्र होंगे—
- व्यापार,
- स्वास्थ्य सेवा,
- शिक्षा,
- कृषि,
- संस्कृति।
भारतीय कामगारों के लिए नई राह—मोबिलिटी एग्रीमेंट पर मुहर संभव
बैठक में एक महत्वपूर्ण मोबिलिटी समझौते को अंतिम रूप देने की संभावना है, जो भारतीय श्रमिकों के रूस में प्रवेश, भर्ती और रोजगार की स्पष्ट रूपरेखा तय करेगा।
व्यापार संतुलन सुधारने की कोशिश
भारत हर साल रूस से लगभग 65 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि निर्यात केवल 5 अरब डॉलर के आसपास है। सरकार इस भारी असंतुलन को कम करने के लिए दवाइयों, कृषि उत्पादों, प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पादों और उपभोक्ता सामानों के निर्यात को बढ़ाने पर काम कर रही है।
उर्वरक सहयोग एक बड़ा स्तंभ
रूस हर साल भारत को 3–4 मिलियन टन उर्वरक की आपूर्ति करता है। दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत चल रही है।
यूरोएशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ FTA पर भी चर्चा
भारत और Eurasian Economic Union (EAEU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बैठक में प्रगति की उम्मीद है, ताकि वार्ताओं को तेज़ किया जा सके।
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