‘हम समयसीमा के दबाव में व्यापार समझौता नहीं करेंगे’: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत किसी भी समयसीमा के दबाव में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं करेगा। उनसे यह पूछा गया था कि क्या अमेरिका के साथ 9 जुलाई की समयसीमा तक कोई समझौता हो सकता..
नयी दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत किसी भी समयसीमा के दबाव में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं करेगा। उनसे यह पूछा गया था कि क्या अमेरिका के साथ 9 जुलाई की समयसीमा तक कोई समझौता हो सकता है, जिसे वॉशिंगटन द्वारा तय किया गया है।
Toy Biz International B2B Expo के मौके पर संवाददाताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा, “भारत राष्ट्रीय हित में व्यापार समझौते करने को तैयार है, लेकिन हम कभी भी समयसीमा के आधार पर समझौते नहीं करते।”
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या 9 जुलाई तक अमेरिका के साथ कोई अंतरिम समझौता (interim deal) संभव है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई समझौता तभी घोषित किया जाएगा जब वह पूरी तरह अंतिम रूप में हो, निष्कर्षित हो और राष्ट्रीय हित में हो।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: क्या हो रहा है?
भारत की वार्ताकार टीम, जिसे मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल लीड कर रहे हैं, वॉशिंगटन में एक हफ्ते की वार्ता के बाद गुरुवार को दिल्ली लौटी।
सूत्रों के अनुसार, भले ही अंतरिम समझौते का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, पर ऑटोमोबाइल और कृषि से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है।
कृषि क्षेत्र: भारत क्यों सतर्क है?
- भारत जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) फसलों और डयरी उत्पादों को लेकर अपने कृषि क्षेत्र को पूरी तरह खोलने से इंकार कर रहा है।
- भारत का कहना है कि जब तक सोयाबीन व मक्का जैसी फसलें गैर-GM प्रमाणित नहीं होतीं, उन्हें भारत में अनुमति नहीं दी जा सकती।
- भारत में GM फसलों पर प्रतिबंध है।
एक अधिकारी ने कहा, “भारत कुछ उत्पादों पर रियायत देने को तैयार है, लेकिन केवल तभी जब भारतीय किसानों की सुरक्षा बनी रहे।”
डेयरी उत्पादों पर भारत की चिंता
- भारत में अधिसंख्य डेयरी किसान छोटे स्तर पर काम करते हैं — एक या दो गाय/भैंस पर आधारित।
- अमेरिका के पशु चारे में मांसाहारी तत्व होते हैं, जो धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, “अमेरिका की वाणिज्यिक स्तर की डेयरी से भारत के किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। लाखों किसानों की आजीविका दांव पर है।”
26% अमेरिकी टैरिफ पर भारत का रुख नरम
- 2 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लागू किए गए 26% ‘Liberation Day’ टैरिफ में से भारत अब आंशिक छूट स्वीकार करने को तैयार है।
- पहले भारत पूरी वापसी चाहता था, लेकिन अब सीमित कृषि रियायतों के बदले आंशिक छूट स्वीकार सकता है।
भारत ने WTO में क्या कहा?
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सूचित किया कि वह अमेरिका के ऑटोमोबाइल टैरिफ के जवाब में कुछ अमेरिकी उत्पादों पर प्रतिकारात्मक शुल्क (retaliatory tariffs) लगाएगा।
- अमेरिका के ये टैरिफ भारत से होने वाले $2.9 बिलियन के निर्यात को प्रभावित करेंगे।
- भारत की प्रतिक्रिया में $723.75 मिलियन के बराबर शुल्क लागू किए जाएंगे।
क्या ये पूरा व्यापार समझौता है?
नहीं, फिलहाल यह एक “early harvest” deal है — जिसमें केवल वस्तुएं (goods) शामिल हैं।
यह अक्टूबर 2025 तक प्रस्तावित व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (FTA) का पहला चरण माना जा रहा है, जिसमें आगे चलकर सेवाएं और निवेश भी शामिल होंगे।
ट्रंप और मोदी फरवरी में 2030 तक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक ले जाने के लिए सहमत हुए थे।
पीयूष गोयल का निष्कर्ष
“FTA तब संभव है जब दोनों पक्षों को लाभ हो।
**राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।”
भारत संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ पहले ही समझौते कर चुका है।
यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड, ओमान, चिली और पेरू के साथ वार्ताएं जारी हैं।
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