इंदौर में दूषित पानी से 4 की मौत, 5 अन्य मौतों की जांच; हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त से पीड़ित लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। साथ ही अदालत ने इस मामले में 2 जनवरी तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस बीच प्रशासन ने 25 दिसंबर से अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि पांच अन्य मौतों के कारणों की जांच ..
भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त से पीड़ित लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। साथ ही अदालत ने इस मामले में 2 जनवरी तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस बीच प्रशासन ने 25 दिसंबर से अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि पांच अन्य मौतों के कारणों की जांच जारी है। मामले में कार्रवाई करते हुए एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि दो अन्य को निलंबित किया गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हसानी ने बताया, “फिलहाल दस्त से चार मौतों की पुष्टि हुई है। अन्य मौतों के कारणों का पता लगाया जा रहा है। मरीजों ने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन की शिकायत हुई।”
उन्होंने कहा कि अब तक करीब 12 हजार लोगों की जांच की जा चुकी है। आशंका है कि शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जलापूर्ति लाइन में रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ।
मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की इंदौर अवकाश पीठ ने इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 2 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने को कहा।
अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, उनकी पहचान नंदलाल (70), उर्मिला यादव (60), तारा कोरी (65) और मंजुला (74) के रूप में हुई है। वहीं जिन पांच अन्य मौतों के कारणों की जांच की जा रही है, उनमें गोमती रावत (50), उमा कोरी (31), संतोष बिगोलिया (53), सीमा प्रजापत (50) और पांच महीने का शिशु अव्यान शामिल हैं।
फिलहाल ऐसे लक्षणों वाले कुल 191 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 41 को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
स्थानीय पार्षद कमल बघेल ने बताया कि 25 दिसंबर को सबसे पहले लोगों ने पानी में अजीब बदबू की शिकायत की थी। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों से समस्या बनी हुई थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात ज्यादा बिगड़ गए।”
स्थानीय निवासी जितेंद्र प्रजापत ने बताया कि उनकी बहन सीमा दूषित पानी पीने के बाद सोमवार को बीमार पड़ी थी। उन्होंने कहा, “उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई… लेकिन प्रशासन ने अब तक दस्त से मौत की पुष्टि नहीं की है।”
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अब तक 70 से अधिक पानी के नमूने लिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, “यह गंभीर मामला है, क्योंकि रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ। मरम्मत का काम जारी है और टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालात पर काबू पाने के लिए सभी संबंधित विभाग शिविर लगाकर काम कर रहे हैं।”
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