‘एआईसीसी ने एजेएल को पुनर्जीवित करने की कोशिश की’: नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी के वकील की दलील
नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को बेचने का नहीं, बल्कि उस संस्था को बचाने का प्रयास किया गया था जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी विरासत का हिस्सा है — यह बात वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने दिल्ली की एक अदालत में..
नयी दिल्ली। नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को बेचने का नहीं, बल्कि उस संस्था को बचाने का प्रयास किया गया था जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी विरासत का हिस्सा है, यह बात वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने दिल्ली की एक अदालत में कही। वे राहुल गांधी की ओर से पेश हो रहे थे और यह दलील स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत में दी गई, जो नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी व अन्य के खिलाफ चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर सुनवाई कर रही है।
चीमा ने कहा, “आजादी के बाद के दौर में AJL कभी भी व्यावसायिक संस्था नहीं रही। हम (AICC) एक ऐसी संस्था को फिर से खड़ा करने का प्रयास कर रहे थे जो स्वतंत्रता आंदोलन की धरोहर रही है। यहां मुद्दा ऋण की वसूली नहीं, बल्कि AJL को फिर से सक्रिय करने का था। एआईसीसी का मकसद किसी तरह का मुनाफा कमाना नहीं था। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वो इस पूरे मामले की एक पक्षपाती व्याख्या है।”
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अन्य लोगों और एक निजी कंपनी यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने मिलकर AJL की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले धोखाधड़ी से कब्जा कर मनी लॉन्ड्रिंग की। चीमा ने कहा कि ईडी के ये आरोप "बेहद भद्दे झूठ" हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ईडी ने यह गलत अनुमान लगाया कि राहुल गांधी 2010 में एआईसीसी के मामलों के प्रभारी थे, क्योंकि उस समय वे संगठन के महासचिव थे। चीमा ने कहा कि कांग्रेस के संविधान के अनुसार, एक ही समय में कई महासचिव होते हैं और कोई एक व्यक्ति एआईसीसी के पूरे मामलों का प्रभारी नहीं हो सकता। इसी तरह, सोनिया गांधी को उस समय AICC की प्रभारी मानना भी गलत निष्कर्ष है, जब AJL को वह ऋण सौंपा गया था।
अब सोमवार को इस मामले में अन्य आरोपियों सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज़ प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बहस जारी रहेगी।
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