डिफॉल्टर बिल्डरों को ही फायदा पहुंचा रहा है रेरा, इसे खत्म कर देना बेहतर: सुप्रीम कोर्ट
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के कामकाज को लेकर गहरी निराशा जताई और सवाल उठाया कि क्या यह संस्था वास्तव में उसी उद्देश्य की पूर्ति कर रही है, जिसके लिए इसका गठन किया गया था। शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर रेरा का फायदा घर खरीदारों की बजाय बिल्डरों को ही मिलता रहा, तो इसे समाप्त कर देना ही..
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के कामकाज को लेकर गहरी निराशा जताई और सवाल उठाया कि क्या यह संस्था वास्तव में उसी उद्देश्य की पूर्ति कर रही है, जिसके लिए इसका गठन किया गया था। शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर रेरा का फायदा घर खरीदारों की बजाय बिल्डरों को ही मिलता रहा, तो इसे समाप्त कर देना ही बेहतर होगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि सभी राज्यों को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि रेरा अधिनियम को लागू करने का असली उद्देश्य क्या था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने, Bar & Bench के हवाले से कहा, “अब सभी राज्यों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए, जिनके लिए रेरा संस्था बनाई गई थी। डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह कुछ और नहीं कर रही है। बेहतर है कि इस संस्था को ही समाप्त कर दिया जाए।”
ये टिप्पणियां उस समय की गईं जब सुप्रीम कोर्ट हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसमें हिमाचल प्रदेश रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया था।
हाईकोर्ट ने 13 जून 2025 की अधिसूचना पर रोक लगाते हुए कहा था कि कार्यालय स्थानांतरण का निर्णय “वैकल्पिक कार्यालय स्थान की पहचान किए बिना” लिया गया। साथ ही अदालत ने यह चिंता भी जताई थी कि 18 आउटसोर्स कर्मचारियों को अन्य बोर्डों और निगमों में समायोजित किए जाने से रेरा का कामकाज लगभग ठप हो सकता है।
हालांकि, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को रेरा कार्यालय धर्मशाला स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि रेरा का मुख्य अपीलीय न्यायाधिकरण भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए, ताकि रेरा के आदेशों से प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पीठ ने निर्देश दिया, “यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि रेरा के आदेशों से प्रभावित व्यक्तियों को असुविधा न हो, मुख्य अपीलीय प्राधिकरण को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए।”
गौरतलब है कि रेरा अधिनियम 2016 को रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने, पारदर्शिता बढ़ाने, घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
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