रूसी तेल पर प्रतिबंध की धमकियों के बीच हरदीप पुरी का जवाब: “यूरोप दोपहर में जितना तेल खरीदता है, भारत तिमाही में भी नहीं..”
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी तेल खरीदने वाले देशों को लेकर प्रतिबंध की धमकियों का सामना कर रहे भारत ने करारा जवाब दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार को यूरोपीय संघ (EU) को फटकार लगाते हुए कहा कि भारत पर प्रतिबंध की बात करने वाले खुद रूस तेल के..
नयी दिल्ली । रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी तेल खरीदने वाले देशों को लेकर प्रतिबंध की धमकियों का सामना कर रहे भारत ने करारा जवाब दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार को यूरोपीय संघ (EU) को फटकार लगाते हुए कहा कि भारत पर प्रतिबंध की बात करने वाले खुद रूस के सबसे बड़े खरीदार हैं।
ऊर्जा वार्ता सम्मेलन (Urja Varta), जो कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स (DGH) द्वारा आयोजित किया गया था, उसमें पुरी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो द्वारा रूसी तेल खरीद पर लगाए जा रहे संभावित प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया दी।
पुरी ने कहा, “एलएनजी या नेचुरल गैस के संदर्भ में यूरोपीय संघ रूस का सबसे बड़ा खरीदार है। वे रूस के एलएनजी निर्यात का 51% खरीदते हैं, जबकि चीन 21% और जापान 18% के साथ दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं।” उन्होंने कहा,
जयशंकर संग पुरानी बातचीत का जिक्र
हरदीप पुरी ने 2022 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई एक पुरानी बातचीत को याद किया।
पुरी के अनुसार, उस समय अमेरिका की यात्रा पर जाने से पहले जयशंकर ने उन्हें फोन कर पूछा था कि यदि उनसे रूस से तेल खरीद को लेकर सवाल किया जाए तो क्या जवाब दिया जाए।
पुरी ने कहा, “मैंने मज़ाक में कहा था, ‘दोस्त, उन्हें बता देना कि वे एक दोपहर में जितना खरीदते हैं, मैं उतना एक तिमाही में भी नहीं खरीदता।’”
पुरी ने आगे हंसते हुए कहा कि शायद उस समय फोन लाइन बिल्कुल साफ नहीं थी और जयशंकर ने गलती से यह कह दिया, “मुझे लगता है आप एक महीने में उतना खरीदते हैं, जितना वे एक दोपहर में।”
जबकि पुरी का असली मतलब था “एक तिमाही में।”
जयशंकर का 2022 का बयान
विदेश मंत्री जयशंकर ने 2022 में एक प्रेस वार्ता में कहा था, “अगर आप रूस से ऊर्जा खरीद की बात कर रहे हैं, तो मेरा सुझाव होगा कि आप यूरोप की ओर ध्यान दें… हम कुछ ऊर्जा खरीदते हैं जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है। लेकिन मेरा मानना है कि आंकड़ों को देखें तो भारत एक महीने में जितनी खरीद करता है, यूरोप उतना एक दोपहर में खरीद लेता है।”
भारत का रुख साफ
पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है, और रूस से सीमित मात्रा में तेल खरीद राष्ट्रीय हित में की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि जो देश खुद सबसे ज़्यादा खरीद कर रहे हैं, वे दूसरों को उपदेश देने की स्थिति में नहीं हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका और यूरोप की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनियाँ दी जा रही हैं। भारत ने इस पर स्पष्ट और तथ्यों पर आधारित जवाब दिया है।
What's Your Reaction?