"पानी है पाकिस्तान की रेड लाइन": सिंधु जल संधि पर फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सख्त चेतावनी
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करेगा, क्योंकि यह देश के 24 करोड़ लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है..
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करेगा, क्योंकि यह देश के 24 करोड़ लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की एक रैली में कहा कि "सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित किए जाने से पाकिस्तान पसीने-पसीने हो गया है।"
असीम मुनीर, जिन्हें हाल ही में भारत के साथ तनाव के बाद फील्ड मार्शल पद पर पदोन्नत किया गया है, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्राचार्यों और शिक्षाविदों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, "पाकिस्तान कभी भी भारत की दादागिरी स्वीकार नहीं करेगा। पानी पाकिस्तान की रेड लाइन है, और हम अपने 24 करोड़ लोगों के इस बुनियादी अधिकार पर कोई समझौता नहीं होने देंगे।"
भारत द्वारा संधि निलंबित करने की पृष्ठभूमि
भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई करने से पहले ही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
भारत का कहना है कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।
गौरतलब है कि पाकिस्तान पीने के पानी और सिंचाई के लिए मुख्यतः भारत से बहने वाली नदियों पर निर्भर करता है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई यह संधि विश्व की सबसे स्थायी जल संधियों में मानी जाती रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
गुजरात के गांधीनगर में एक चुनावी सभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "इस संधि के तहत भारत को जो पानी मिलना चाहिए था, उसका केवल 2-3 प्रतिशत ही हम उपयोग कर पाए। हमने अभी कुछ खास किया भी नहीं है, और वे (पाकिस्तान) पसीना-पसीना हो गए हैं।"
इसके जवाब में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बुधवार को कहा कि पीएम मोदी का बयान "दुखद और चिंताजनक" है। बयान में कहा गया, "एक साझा और संधि-बद्ध संसाधन जैसे पानी को हथियार बनाना अंतरराष्ट्रीय मानकों से विचलन है। यह भारत के क्षेत्रीय व्यवहार और उसके वैश्विक दावों के बीच विरोधाभास को दर्शाता है।"
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