"ऑपरेशन सिंदूर" में भाजपा सरकार को शशि थरूर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे 'अप्रत्याशित विपक्षी सहयोगी' मिले
जंगें अक्सर यह दिखा देती हैं कि असली दोस्त कौन हैं। एनडीए सरकार को "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान कई विपक्षी नेताओं से अप्रत्याशित समर्थन मिला है..
नयी दिल्ली। जंगें अक्सर यह दिखा देती हैं कि असली दोस्त कौन हैं। एनडीए सरकार को "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान कई विपक्षी नेताओं से अप्रत्याशित समर्थन मिला है।
जहाँ यह ऑपरेशन सैन्य अधिकारियों की वीरता को दर्शाता है विशेष रूप से डीजीएमओ और उनकी टीम द्वारा देश को दी गई जानकारी और सोफिया कुरैशी व व्योमिका सिंह जैसे जांबाज़ व्यक्तियों की भूमिका को उजागर करता है, वहीं कुछ विपक्षी नेता भी सामने आए जिन्होंने पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर सरकार के प्रयासों का समर्थन किया।
असदुद्दीन ओवैसी
सरकार के कट्टर आलोचक रहे ओवैसी अक्सर भारतीय जनता पार्टी पर मुसलमान विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। वहीं उनके विरोधी उन्हें भाजपा की "बी टीम" भी कह चुके हैं।
लेकिन, "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान ओवैसी ने एक सशक्त और मुखर मुस्लिम नेता के रूप में पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान की हरकतों को इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ करार दिया।
ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर का खुलकर समर्थन किया और कहा कि पाकिस्तान में मौजूद सभी आतंकी ठिकानों को नष्ट कर देना चाहिए।
उनका यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे मुस्लिम समुदाय के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और अक्सर उनके अधिकारों की आवाज़ बनकर उभरते हैं। पाकिस्तान अकसर कश्मीर मुद्दे पर भारत में मुसलमानों की कथित स्थिति का हवाला देकर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश करता है।
ऐसे में ओवैसी की यह प्रतिक्रिया न सिर्फ इस दुष्प्रचार का खंडन करती है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एकता की छवि को भी मजबूती देती है, जहाँ हिंदू और अल्पसंख्यक शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में हैं।
ओवैसी, दरअसल, पाकिस्तान और उसके समर्थकों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का प्रतिवाद करते हैं।
शशि थरूर
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद थरूर ने सरकार के प्रति जो अडिग समर्थन दिखाया, वह उल्लेखनीय है।
हालांकि उनके ही पार्टी सहयोगी जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि थरूर की राय कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है, फिर भी थरूर को सरकार के पक्ष में उनके स्पष्ट रुख के लिए सराहना मिली है।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की, तो कांग्रेस ने सरकार पर शिमला समझौते की अवहेलना और भारत की विदेश नीति से विचलन का आरोप लगाया। लेकिन, थरूर ने इसका खंडन करते हुए कहा कि भारत कभी भी किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।
उनका यह बयान न सिर्फ कांग्रेस के आलोचनात्मक रुख को कमजोर करता है, बल्कि सरकार का मनोबल भी बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट संदेश देता है।
थरूर की सोशल मीडिया पर सक्रियता और उनका स्पष्ट दृष्टिकोण सरकार की बात को और बल देता है।
निष्कर्ष
ओवैसी, थरूर और मनीष तिवारी जैसे अन्य नेता, जो सामान्यतः भाजपा की विचारधारा से अलग माने जाते हैं, उन्होंने इस अवसर पर सरकार के पक्ष में खड़े होकर उसकी स्थिति को मजबूत किया है और उसके दृष्टिकोण के प्रवक्ता के रूप में सामने आए हैं।
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