राजस्थान: SHO की कुर्सी पर बैठे BJP विधायक बालमुखुंदाचार्य, फोटो वायरल होने पर उठे सवाल
राजधानी जयपुर की हवा महल सीट से भाजपा विधायक बालमुखुंदाचार्य एक नये विवाद में घिर गए हैं। रविवार को रामगंज थाने के SHO की कुर्सी पर बैठे विधायक की तस्वीर वायरल होने..
जयपुर। राजधानी जयपुर की हवा महल सीट से भाजपा विधायक बालमुखुंदाचार्य एक नये विवाद में घिर गए हैं। रविवार को रामगंज थाने के SHO की कुर्सी पर बैठे विधायक की तस्वीर वायरल होने के बाद विपक्ष और पुलिस महकमे में नाराजगी देखी गई।
यह तस्वीर स्वयं विधायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट की थी, जिसमें वे पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करते नजर आ रहे हैं, और SHO की कुर्सी पर बैठे हैं।
क्या लिखा विधायक ने?
पोस्ट के साथ कैप्शन में बालमुखुंदाचार्य ने लिखा कि उन्होंने रामगंज, गालटा गेट और माणक चौक थाना प्रभारियों के साथ श्रावण माह में होने वाली कांवड़ यात्राओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा की।
हालांकि, बैठक की मंशा भले सकारात्मक रही हो, लेकिन SHO की कुर्सी पर बैठने का उनका यह अंदाज पुलिसिया अनुशासन और संस्थागत मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
पुलिस महकमे में असहमति
कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निजी तौर पर इस घटना पर नाराजगी जताई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अब यह आम चलन बन गया है कि विधायक थाने में SHO की कुर्सी पर बैठ जाते हैं। यह अनुशासन और प्रशासनिक सीमाओं का उल्लंघन है।”
एक अन्य इंस्पेक्टर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या कोई विधायक या सांसद किसी IPS अफसर की कुर्सी पर बैठने की हिम्मत करेगा? अगर नहीं, तो SHO की कुर्सी को क्यों हल्का समझा जाए?”
विपक्ष का हमला – कांग्रेस MLA रफीक खान का बयान
आदर्श नगर से कांग्रेस विधायक रफीक खान ने इस तस्वीर को लेकर X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “BJP विधायक रामगंज थाने में SHO की कुर्सी पर बैठकर क्या साबित करना चाहते हैं?
यह न सिर्फ प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि विधायिका द्वारा कार्यपालिका में हस्तक्षेप का खुला उदाहरण है।
इससे राज्य में क़ानून व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाता है।”
नियमों और प्रोटोकॉल पर सवाल
राज्य के प्रोटोकॉल के अनुसार, विधायक थाने में जाकर निरीक्षण या बातचीत कर सकते हैं लेकिन प्रशासनिक कुर्सी पर बैठना न तो प्रथागत है, न ही यह अधिकार क्षेत्र में आता है। यह घटना इस बात पर बहस छेड़ती है कि जनप्रतिनिधियों को अपनी भूमिका की सीमाओं का कितना ध्यान रखना चाहिए।
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