भाजपा सांसद नागेंद्र रॉय ने मोदी, मुर्मू को बताया ‘पाकिस्तानी’, SIR को डिटेंशन कैंप से जुड़ा बताया
अपनी ही पार्टी के नेताओं को चौंकाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद नागेंद्र रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस को “पाकिस्तानी” और “बांग्लादेशी” करार दे..
नयी दिल्ली। अपनी ही पार्टी के नेताओं को चौंकाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद नागेंद्र रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस को “पाकिस्तानी” और “बांग्लादेशी” करार दे दिया।
नागेंद्र रॉय ने ये भड़काऊ टिप्पणियां कूचबिहार जिले के सिताई में अपने समर्थकों की एक सभा को संबोधित करते हुए कीं।
SIR के खिलाफ भी बोले नागेंद्र रॉय
भाजपा सांसद ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) अभियान के खिलाफ भी तीखी बातें कहीं। यह प्रक्रिया इस साल की शुरुआत में बिहार से शुरू होने के बाद से ही विभिन्न वर्गों की कड़ी आलोचना का सामना कर रही है।
रॉय ने कहा कि इस विवादित कवायद के चलते यदि लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, तो उनके बैंक खाते फ्रीज किए जा सकते हैं और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोगों की नागरिकता या मूल स्थान की जांच के लिए डिटेंशन कैंप बनाए जा सकते हैं।
इतना ही नहीं, रॉय ने यह आरोप भी लगाया कि जो लोग यह प्रक्रिया चला रहे हैं, वे खुद ही विदेशी हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने किया किनारा
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने नागेंद्र रॉय के बयानों पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR और डिटेंशन कैंप के बीच कोई संबंध नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
नागेंद्र रॉय की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केसरिया पार्टी SIR के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए एक गहरी साजिश रच रही है।
SIR को लेकर पहले से ही विवाद
यह प्रक्रिया तब से विवादों में है, जब जून में चुनाव आयोग ने इसकी घोषणा की थी। आलोचकों का आरोप है कि इसके जरिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को “पिछले दरवाजे से” लागू करने की कोशिश की जा रही है। इससे मतदाताओं में भय का माहौल पैदा हुआ है और बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) पर भी अनावश्यक दबाव बढ़ा है।
BLO की मौतों पर गंभीर चिंता
SPECT फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अभियान की शुरुआत के बाद से छह राज्यों में कम से कम 33 बूथ लेवल अधिकारियों ने आत्महत्या कर ली है। हालांकि, इस रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के BLOs की मौतों को शामिल नहीं किया गया है।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि SIR से जुड़ी ड्यूटी के दौरान राज्य में कम से कम 40 सरकारी अधिकारियों की जान जा चुकी है।
इस पूरे मामले ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और प्रशासनिक दबाव को लेकर एक बार फिर देशव्यापी बहस छेड़ दी है।
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