पीएम मोदी मानहानि मामले में राहुल गांधी की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
Bombay High Court ने मंगलवार को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले को रद्द (क्वैश) करने की मांग..
मुंबई।
Bombay High Court ने मंगलवार को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले को रद्द (क्वैश) करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति N R Borkar की एकल पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। यह मामला 28 अगस्त 2019 को गिरगांव स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर एक आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़ा है, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य महेश श्रीश्रीमल ने दाखिल किया था।
क्या है पूरा मामला
शिकायत में कहा गया है कि राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “कमांडर-इन-थीफ” शब्द का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री के लिए इसी तरह के शब्दों का प्रयोग किया।
महेश श्रीश्रीमल का दावा है कि इस कथित टिप्पणी के जरिए राहुल गांधी ने न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि भाजपा के सभी सदस्यों और देश के नागरिकों को “चोर” कहने जैसा आरोप लगाया है।
हाई कोर्ट में क्यों पहुंचे राहुल गांधी
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को राहुल गांधी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने इसे निरर्थक, तुच्छ और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए रद्द किए जाने की मांग की।
अपनी याचिका में राहुल गांधी ने कहा कि यह शिकायत केवल शिकायतकर्ता के छिपे हुए राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से दायर की गई है।
राहुल गांधी की ओर से कानूनी दलीलें
राहुल गांधी के वकीलों ने Code of Criminal Procedure (CrPC) की धारा 199(2) का हवाला दिया। इस प्रावधान के अनुसार, यदि किसी लोक सेवक के खिलाफ उसके सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित आचरण को लेकर अपराध का आरोप है, तो उस पर संज्ञान सत्र न्यायालय द्वारा लिया जाना चाहिए।
वकीलों ने तर्क दिया कि इस प्रावधान के चलते महेश श्रीश्रीमल को इस तरह की शिकायत दर्ज कराने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। इसके अलावा, यह भी दलील दी गई कि Indian Penal Code (IPC) की धारा 499 की व्याख्या-2 के तहत किसी राजनीतिक दल को ऐसे व्यक्तियों का समूह नहीं माना गया है, जो मानहानि की शिकायत दाखिल कर सके।
राहुल गांधी की कानूनी टीम ने कहा कि इससे महेश श्रीश्रीमल किसी प्रतिनिधि हैसियत में शिकायत दर्ज कराने के पात्र नहीं रह जाते।
शिकायतकर्ता का पक्ष
शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल की ओर से याचिका का विरोध किया गया। उन्होंने दलील दी कि उन्होंने अपने बयान और सबूतों के जरिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसि) मामला स्थापित किया है।
यह भी कहा गया कि महेश श्रीश्रीमल स्वयं एक पीड़ित व्यक्ति हैं और उन्होंने यह शिकायत Bharatiya Janata Party की महाराष्ट्र इकाई के सदस्य के रूप में दायर की है।
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