CJI गवई पर जूता फेंकने की घटना पर परिवार का आक्रोश...गवई की माँ और बहन ने कहा, “देश के माथे पर कलंक”
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई पर सुप्रीम कोर्ट में हुए जूता फेंकने की घटना को लेकर उनके परिवार ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। CJI गवई की माँ कमलताई गवई और बहन कीर्ति अर्जुन गवई ने इस घटना को “देश के माथे पर कलंक” बताते हुए कहा कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं
मुंबई। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई पर सुप्रीम कोर्ट में हुए जूता फेंकने की घटना को लेकर उनके परिवार ने कड़ा रोष व्यक्त किया है।
CJI गवई की माँ कमलताई गवई और बहन कीर्ति अर्जुन गवई ने इस घटना को “देश के माथे पर कलंक” बताते हुए कहा कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है।
कमलताई गवई का बयान
CJI की माँ कमलताई गवई ने कहा, “डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर आधारित है। किसी को कानून अपने हाथ में लेकर अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं है। हर विवाद का समाधान संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीक़े से होना चाहिए।”
बहन कीर्ति गवई ने कहा, “यह केवल हमला नहीं, विषैली सोच है”
CJI की बहन कीर्ति अर्जुन गवई ने भी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यह केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि एक विषैली विचारधारा का प्रदर्शन है जिसे रोकना आवश्यक है।
इस तरह के असंवैधानिक कृत्य करने वालों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए। विरोध संवैधानिक स्तर पर और शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए ताकि बाबासाहेब के आदर्शों को ठेस न पहुँचे।”
घटना क्या थी
6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में वकील राकेश किशोर ने अचानक मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की बेंच के सामने जाकर जूता फेंकने की कोशिश की।
सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू में लेकर कोर्ट से बाहर निकाल दिया। आँखों देखा हाल बताता है कि जाते समय राकेश किशोर “सनातन धर्म का अपमान हिंदुस्तान बर्दाश्त नहीं करेगा” के नारे लगा रहा था।
घटना के दौरान CJI गवई शांत बने रहे और अदालत के वकीलों से कहा, “ऐसी घटनाएँ मुझे प्रभावित नहीं करतीं, कृपया कार्यवाही जारी रखें।”
कार्रवाई और वकील की सफाई
राकेश किशोर को कुछ समय के लिए हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया। हालाँकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस पर सख़्त रुख अपनाते हुए उनका वकालत करने का लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसके बाद वे अब किसी भी कोर्ट या ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
बाद में उन्होंने समाचार एजेंसी IANS से कहा, “यह कार्य मैंने नहीं, बल्कि भगवान ने मुझसे करवाया। यह एक ‘ईश्वरीय संदेश’ था।” उन्होंने दावा किया कि 16 सितंबर को CJI गवई की बेंच में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान “सनातन धर्म का अपमान” हुआ था।
वह मामला खजुराहो में भगवान विष्णु की एक टूटी मूर्ति से जुड़ा था। राकेश किशोर का कहना है कि जब उन्होंने मूर्ति की मरम्मत की मांग उठाई, तो CJI ने कथित तौर पर कहा, “आप इतने बड़े भक्त हैं, तो खुद जाकर भगवान से कहिए कि वह मूर्ति ठीक कर लें।”
इस टिप्पणी से आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया, जो अब पूरे देश में विवाद और निंदा का विषय बन गया है।
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