अमेरिकी टैरिफ का कड़ा विरोध करते हुए चीन ने किया भारत का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तियानजिन में होने वाली आगामी बैठक से पहले, भारत-चीन संबंधों में नजदीकी बढ़ाने का संकेत देते हुए चीन के भारत में राजदूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को कहा कि चीन अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ का कड़ा विरोध करता है और इस मामले में भारत के साथ..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तियानजिन में होने वाली आगामी बैठक से पहले, भारत-चीन संबंधों में नजदीकी बढ़ाने का संकेत देते हुए चीन के भारत में राजदूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को कहा कि चीन अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ का कड़ा विरोध करता है और इस मामले में भारत के साथ खड़ा है।
राजदूत ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाया है और और भी बढ़ाने की धमकी दी है। उन्होंने इसे दबाव की राजनीति बताया। शू ने कहा, “ऐसे कदमों के सामने चुप्पी या समझौता करना दबंगई को और बढ़ावा देता है। चीन दृढ़ता से भारत के साथ खड़ा रहेगा और WTO आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि व्यापार का सार एक-दूसरे की खूबियों को पूरक बनाना और “विन-विन” परिणाम हासिल करना है, न कि यह देखना कि कौन जीता और कौन हारा। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने लंबे समय तक मुक्त व्यापार से भारी लाभ उठाया है, लेकिन अब वह टैरिफ को मोलभाव का हथियार बनाकर अलग-अलग देशों से मनमाने दाम वसूल रहा है।”
मोदी-शी मुलाकात से पहले संदेश
राजदूत के बयान ऐसे समय आए हैं जब मोदी 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने तियानजिन जाएंगे। वहीं उनकी द्विपक्षीय बैठकें शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य सदस्य देशों के नेताओं से होंगी।
शू ने कहा कि भारत और चीन के बीच चुनौतियाँ रही हैं लेकिन “दोस्ती और सहयोग हमेशा मुख्य विषय रहा है। कठिनाइयाँ आ सकती हैं, लेकिन एकता और सहयोग ही एकमात्र विकल्प हैं।”
व्यापारिक सहयोग पर जोर
उन्होंने रणनीतिक विश्वास बढ़ाने और साझा हितों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
- चीन ने कहा कि वह भारतीय वस्तुओं के लिए अपने बाजार को और खोलने को तैयार है।
- भारत के पास आईटी, सॉफ्टवेयर और बायोमेडिसिन में प्रतिस्पर्धी बढ़त है, जबकि चीन इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और नई ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- उन्होंने कहा कि अधिक भारतीय कंपनियों का चीन में निवेश स्वागत योग्य होगा।
- साथ ही उम्मीद जताई कि भारत चीनी कंपनियों को निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल देगा।
राजदूत शू ने कहा कि ऐसा करने से दोनों देशों की उद्योगों का विकास होगा और जनता को फायदा मिलेगा।
What's Your Reaction?