‘टल गयी बड़ी त्रासदी’: शुभांशु शुक्ला की उड़ान से पहले ISRO ने पकड़ लिया Falcon-9 का फ्यूल लीक, जो SpaceX से छूट गया था..!
एक चौंकाने वाले खुलासे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन-9 रॉकेट में ईंधन का रिसाव सिर्फ इसलिए पकड़ा और ठीक किया जा सका क्योंकि ISRO ने अस्पष्ट आश्वासनों को मानने से इनकार कर दिया और पूरी पारदर्शिता की मांग..
नयी दिल्ली। एक चौंकाने वाले खुलासे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन-9 रॉकेट में ईंधन का रिसाव सिर्फ इसलिए पकड़ा और ठीक किया जा सका क्योंकि ISRO ने अस्पष्ट आश्वासनों को मानने से इनकार कर दिया और पूरी पारदर्शिता की मांग की।
यह वही रॉकेट था जो चार अंतरिक्ष यात्रियों, जिनमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल थे, को अंतरिक्ष में ले जाने वाला था।
नारायणन ने कहा कि शुरू में स्पेसएक्स ने इस अनियमितता को “छोटा सा रिसाव” बताकर टाल दिया था। लेकिन ISRO के लगातार सवालों ने कंपनी को उड़ान से ठीक कुछ घंटे पहले लॉन्च टालने पर मजबूर कर दिया। बाद में जांच में पता चला कि यह कोई मामूली रिसाव नहीं था, बल्कि ईंधन पाइप में एक खतरनाक दरार थी, जो उड़ान के बीच में ही “विनाशकारी विफलता” का कारण बन सकती थी।
ISRO बनाम SpaceX: कैसे पकड़ा गया रिसाव
नारायणन ने तनावपूर्ण पलों को याद करते हुए कहा कि ISRO ने संदिग्ध ऑक्सीजन सेंसर डेटा के बाद स्पेसएक्स से टेस्ट रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन जवाब टालमटोल वाले थे।
उन्होंने बताया, “उन्होंने कहा कि कमेटियों ने मंजूरी दे दी है। शायद उन्हें लगा कि यह मामूली रिसाव है। लेकिन जब हमने पूछा कि रिसाव कहाँ है, तो कहा – नहीं मिला। जब रिसाव की दर पूछी, तो कहा – यह गोपनीय है। 14 सवालों में से सिर्फ़ 2 का जवाब मिला।”
ISRO की जिद पर दबाव बढ़ा और स्पेसएक्स को 11 नवंबर शाम 5:15 बजे लॉन्च रोकना पड़ा। इंजीनियरों ने जब जांच की तो दरार सामने आई।
नारायणन ने कहा, “अगर उड़ान के दौरान रॉकेट टूट जाता तो यह सीधी-सीधी त्रासदी होती, और कुछ नहीं।”
शुभांशु शुक्ला: ISS से लौटने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री
यह घटना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सिऑम-4 मिशन से सुरक्षित लौट आए हैं। वह अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लौटने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।
नारायणन ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, शुभांशु शुक्ला और अंतरिक्ष यात्री प्रशांत नायर के साथ प्रेस वार्ता में कहा, “पिछले 10 सालों में हमारी उपलब्धियाँ अद्भुत हैं। 2005–2015 की तुलना में 2015–2025 के बीच मिशनों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।”
आगे की दिशा: NASA साझेदारी, G20 सैटेलाइट और निजी क्षेत्र
नारायणन ने बताया कि ISRO अगले तीन महीनों में NASA के साथ मिलकर 6,500 किलोग्राम वजनी अमेरिकी संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करने जा रहा है। अब तक भारत ने 34 देशों के 433 उपग्रह लॉन्च किए हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा..
- दक्षिण एशिया सैटेलाइट की परिकल्पना, निर्माण, प्रक्षेपण और पड़ोसी देशों को उपहार।
- G20 देशों के लिए नया सैटेलाइट प्रोजेक्ट।
- निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का उभार – जहाँ आज 300 से अधिक स्टार्टअप्स हैं, जबकि एक दशक पहले सिर्फ़ एक था।
नारायणन ने बताया कि निजी कंपनियों ने पहले ही दो सबऑर्बिटल मिशन पूरे कर लिए हैं। यह बदलाव की रफ्तार दिखाता है।
भारत का बढ़ता कद
1963 में थुंबा से पहली रॉकेट लॉन्चिंग के बाद ISRO अब तक 240 मिशन, 133 उपग्रह प्रक्षेपण और 102 लॉन्च व्हीकल मिशन कर चुका है। लेकिन, यह ताज़ा घटना एक नयी हकीकत को उजागर करती है कि भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष अन्वेषण का साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष सुरक्षा मानकों का संरक्षक भी है।
नारायणन के शब्दों में, “ISRO के चार दशकों के अनुभव ने हमें वह खतरा दिखा दिया जिसे बाकी लोग मामूली मान बैठे थे। यही सतर्कता शायद अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता को नयी ऊँचाई देने का कारण बनी।”
ISRO Chairman on fixing Falcon 9 issue before Axiom 4 launch disaster
“They thought it was a minor leak, but it was a crack in the fuel line — a risk that could have caused a catastrophic failure.” pic.twitter.com/eWasY3rMBj — Sputnik India (@Sputnik_India) August 21, 2025
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