कोयला गैसीकरण को बढ़ावा: कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी, आयात निर्भरता घटाने पर जोर

केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 37,500 करोड़ रुपये की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना का उद्देश्य 75 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना और लगभग 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश..

कोयला गैसीकरण को बढ़ावा: कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी, आयात निर्भरता घटाने पर जोर
14-05-2026 - 10:42 AM

केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 37,500 करोड़ रुपये की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना का उद्देश्य 75 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना और लगभग 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित करना है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में “सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन योजना” को स्वीकृति दी गई।

2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना भारत के कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण कार्यक्रम को तेज गति देने के लिए लाई गई है।

उन्होंने कहा, इस योजना का उद्देश्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।”

उन्होंने बताया कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और LNG, यूरिया, अमोनिया तथा मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता घटेगी।

क्या है कोयला गैसीकरण?

सरकार के अनुसार, कोयला गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयला और लिग्नाइट को “सिंथेसिस गैस” यानी “सिंगैस” में बदला जाता है।

इस सिंगैस का उपयोग निम्न क्षेत्रों में किया जा सकता है:

  • बिजली उत्पादन
  • रसायन निर्माण
  • उर्वरक उद्योग
  • अन्य औद्योगिक उत्पाद

भारत के पास विशाल कोयला भंडार

भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडार वाले देशों में शामिल है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार..

संसाधन

अनुमानित भंडार

कोयला

लगभग 401 अरब टन

लिग्नाइट

लगभग 47 अरब टन

वर्तमान में भारत की कुल ऊर्जा जरूरतों में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक है।

परियोजनाओं को मिलेगा 20% तक प्रोत्साहन

नई योजना के तहत सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को संयंत्र और मशीनरी लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।

परियोजनाओं का चयन “पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया” के माध्यम से किया जाएगा।

सरकार ने बताया कि प्रोत्साहन राशि परियोजना की प्रगति के आधार पर चार समान किश्तों में जारी की जाएगी।

प्रोत्साहन राशि की सीमा तय

सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार:

  • एक परियोजना के लिए अधिकतम प्रोत्साहन: 5,000 करोड़ रुपये
  • एक उत्पाद श्रेणी (सिंथेटिक नेचुरल गैस और यूरिया को छोड़कर) के लिए सीमा: 9,000 करोड़ रुपये
  • एक कॉरपोरेट समूह के लिए कुल सीमा: 12,000 करोड़ रुपये

30 वर्षों तक कोयला लिंकिंग की सुविधा

सरकार ने इस योजना के साथ एक बड़ा नीतिगत सुधार भी किया है।

सिंगैस उत्पादन आधारित कोयला गैसीकरण” क्षेत्र में कोयला लिंकिंग की अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष कर दिया गया है। इससे निवेशकों को दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

3 लाख करोड़ तक निवेश और 50 हजार रोजगार

सरकार का अनुमान है कि इस योजना से:

  • 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आएगा
  • लगभग 25 परियोजनाएं शुरू होंगी
  • 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे

खास तौर पर कोयला उत्पादक क्षेत्रों में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

आयात बिल घटाने की तैयारी

सरकार के अनुसार, भारत का LNG, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, कोकिंग कोल और मेथनॉल जैसे उत्पादों का आयात बिल वित्त वर्ष 2025 में लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा।

सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति ने इस आयात निर्भरता की कमजोरी को और उजागर किया है।

नई योजना के जरिए भारत:

  • LNG आयात कम करना चाहता है
  • उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना चाहता है
  • वैश्विक मूल्य अस्थिरता और आपूर्ति संकट से बचाव करना चाहता है

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

सरकार ने कहा कि यह योजना “टेक्नोलॉजी एग्नॉस्टिक” होगी, लेकिन इसमें स्वदेशी तकनीकों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इसका उद्देश्य:

  • घरेलू कोयला गैसीकरण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना
  • विदेशी EPC ठेकेदारों पर निर्भरता कम करना है।

सरकार को होगा अतिरिक्त राजस्व

योजना के तहत 75 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण से सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है।

इसके अलावा डाउनस्ट्रीम उद्योगों से GST और अन्य करों के रूप में भी अतिरिक्त आय होगी।

पहले की योजनाओं का विस्तार

यह नई योजना 2021 में शुरू किए गए “नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन” और जनवरी 2024 में स्वीकृत 8,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना का विस्तार मानी जा रही है।

सरकार के अनुसार, पहले चरण में स्वीकृत 6,233 करोड़ रुपये की लागत वाली आठ परियोजनाओं पर काम पहले से जारी है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।