भावी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई ने कहा, संविधान सर्वोपरि है..
देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) नामित न्यायमूर्ति बीआर गवई ने रविवार को दोहराया कि संविधान सर्वोच्च है और राज्य की सभी संस्थाओं को इसके दायरे में रहकर काम करना चाहिए..
नयी दिल्ली। देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) नामित न्यायमूर्ति बीआर गवई ने रविवार को दोहराया कि संविधान सर्वोच्च है और राज्य की सभी संस्थाओं को इसके दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
उन्होंने पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा, "आखिरकार, संविधान ही सर्वोच्च है। लोकतंत्र की तीनों शाखाओं को संविधान के दायरे में रहकर ही कार्य करना चाहिए।"
न्यायमूर्ति गवई के यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब राजनीतिक नेताओं और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा संसद की सर्वोच्चता को लेकर वक्तव्य दिए गए हैं, विशेष रूप से उस समय जब सर्वोच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में राष्ट्रपति को विधायिका द्वारा पारित विधेयकों पर तीन महीने में निर्णय लेने की समयसीमा तय की है।
उन्होंने कहा, "संविधान सर्वोच्च है। यह बात केशवानंद भारती मामले में 13 न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए निर्णय में स्पष्ट रूप से कही गई है।"
अनौपचारिक बातचीत में न्यायमूर्ति गवई ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके प्रभाव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्तमान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना से एक पूर्ण पीठ की बैठक बुलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए बयान जारी करने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा, "आखिरकार हम भी देश के जिम्मेदार नागरिक हैं और ऐसे घटनाक्रमों से प्रभावित होते हैं... हम भी नागरिक होने के नाते चिंतित होते हैं। जब पूरा देश शोक में डूबा हो, तब सुप्रीम कोर्ट अलग-थलग नहीं रह सकता।"
न्यायमूर्ति गवई ने महिलाओं की न्यायिक पदों पर अधिक भागीदारी और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य हाशिए पर मौजूद वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और यह भी जोड़ा कि संविधानिक पदों पर नियुक्ति में आरक्षण नहीं होता।
चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा फ्रीबी (मुफ्त सुविधाएं) देने की परंपरा के आलोचक रहे न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वे इस प्रथा को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वे उन मामलों को प्राथमिकता देंगे, जिनका व्यापक जनसंख्या पर प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि न्यायपालिका के समक्ष लंबित मामलों की अधिकता एक प्रमुख समस्या है, जिससे न्याय मिलने में देरी होती है। उन्होंने कहा कि वे ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर स्तर पर इस समस्या को कम करने के लिए जो बन सकेगा, करेंगे।
न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भले ही कुछ हद तक संकोच रहा हो, लेकिन कुल मिलाकर भावना इसके पक्ष में रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों द्वारा सरकारी पद स्वीकारने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि वे दूसरों की ओर से तो नहीं बोल सकते, लेकिन स्वयं किसी भी प्रकार का पद ग्रहण नहीं करेंगे।
न्यायमूर्ति गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।
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