दीपावली 2025 : कब मनाई जाएगी और क्यों? जानिए तिथि, मुहूर्त और महत्व

दीपावली या दिवाली हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीपावली और कृष्ण जन्माष्टमी ही दो ऐसे पर्व हैं जो कृष्ण पक्ष में आते हैं। दीपावली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। हर वर्ष यह पर्व कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाया..

दीपावली 2025 : कब मनाई जाएगी और क्यों? जानिए तिथि, मुहूर्त और महत्व
17-10-2025 - 10:23 AM
17-10-2025 - 10:59 AM

जयपुर। दीपावली या दिवाली हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीपावली और कृष्ण जन्माष्टमी ही दो ऐसे पर्व हैं जो कृष्ण पक्ष में आते हैं। दीपावली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। हर वर्ष यह पर्व कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

इस वर्ष (2025) दिवाली की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है क्योंकि अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 21 अक्टूबर की शाम तक रहेगी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि दीपावली किस दिन मनाई जानी चाहिए?

पंडित अथर्व शर्मा ने बताया कि भारतीय गणना के अनुसार, दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा क्योंकि लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त उसी दिन की प्रदोष काल और वृषभ काल में पड़ रहा है।

दीवाली 2025: तिथि और समय

अवसर

तिथि और दिन

तिथि (Tithi)

शुभ मुहूर्त / समय

धनतेरस

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

त्रयोदशी

07:17 PM – 08:20 PM

यम दीपदान

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

त्रयोदशी

05:49 PM – 07:05 PM

छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी)

सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

चतुर्दशी

अभ्यंग स्नान: 05:12 AM – 06:25 AM

लक्ष्मी पूजा (मुख्य दीपावली)

सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

अमावस्या

07:08 PM – 08:18 PM

गोवर्धन पूजा

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

प्रतिपदा

प्रातःकाल: 06:26 AM – 08:42 AM, सायं: 03:29 PM – 05:44 PM

भाई दूज

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

द्वितीया

01:13 PM – 03:28 PM

 

अमावस्या तिथि

  • शुरू: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर 03:44 बजे
  • समाप्त: 21 अक्टूबर 2025, शाम 05:54 बजे

इसलिए ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर की प्रदोष बेला में (संध्याकाल में) मनाना सबसे शुभ रहेगा।

दीपावली का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, अमावस्या तिथि पर दीपावली मनाना अत्यंत शुभ माना गया है।
कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम रावण का वध कर 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीयों की रौशनी से आलोकित किया था। तभी से यह पर्व प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी घर-घर भ्रमण करती हैं और जहां स्वच्छता, श्रद्धा और उजाला होता है, वहां समृद्धि और सौभाग्य का वास करती हैं।

दीपावली पर्व का सारांश

दिनांक

पर्व

विशेषता

18 अक्टूबर (शनिवार)

धनतेरस / यम दीपदान

लक्ष्मी व धन्वंतरि पूजा, दीपदान से अकाल मृत्यु से रक्षा

20 अक्टूबर (सोमवार)

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