मोदी पर टिप्पणी को लेकर चुनाव आयोग का कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
ऐसे समय में जब कई राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक प्रसारण चैनलों पर दिखाए गए भाषण को आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन बता रहे हैं, भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार (22 अप्रैल) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस..
नयी दिल्ली। ऐसे समय में जब कई राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक प्रसारण चैनलों पर दिखाए गए भाषण को आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन बता रहे हैं, भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार (22 अप्रैल) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी किया है। आयोग ने खड़गे से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब मंगलवार को चेन्नई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के अंतिम दिन प्रचार के दौरान दिए गए बयान को लेकर भाजपा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला था। यह नोटिस तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान से ठीक एक दिन पहले जारी किया गया है।
दरअसल, खड़गे विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था, “वे (AIADMK) मोदी के साथ कैसे जा सकते हैं? वह एक आतंकवादी हैं। और वह समानता में विश्वास नहीं करते। उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती। और ये लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं, अन्नादुरई, कामराज, पेरियार, कलाईनार और बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा को कमजोर कर रहे हैं।”
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया के बाद खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मतलब यह था कि “मोदी लोगों और राजनीतिक दलों को भयभीत कर रहे हैं,” न कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहा।
गौरतलब है कि 18 अप्रैल को मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तीन दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चुनाव आयोग ने उस भाषण पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 700 से अधिक चिंतित नागरिकों ने आयोग को शिकायत भेजकर इस भाषण को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। हस्ताक्षरकर्ताओं में पूर्व नौकरशाह, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं ने आचार संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह का भाषण सत्तारूढ़ दल को अनुचित लाभ देता है और निष्पक्ष चुनावी माहौल को प्रभावित करता है।
विपक्षी दलों कांग्रेस, CPI(M) और CPI ने भी इस मुद्दे को उठाया है, जबकि वामपंथी दलों ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
अपने असाधारण सार्वजनिक संबोधन में मोदी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। यह भाषण उस समय आया जब उनकी सरकार द्वारा महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा का विस्तार और परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने की विवादित योजना निचले सदन में विफल हो गई थी। उन्होंने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और DMK सहित कई दलों का नाम लिया था। TMC और DMK उन राज्यों में प्रमुख दल हैं, जहां अगले दिन मतदान होना था।
कांग्रेस ने इस नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन “उसका व्यवहार संविधान पर हमला है और यह शर्मनाक है, जिसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त पर है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह काफी समय से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इशारों पर काम कर रहा है। पश्चिम बंगाल सहित कई जगहों पर बड़े पैमाने पर वोट चोरी कराने के बाद, आज उसने एक बार फिर खुद को गृह मंत्रालय के अधीन कार्यालय की तरह काम करते हुए दिखाया है।”
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