EPS और अमित शाह के ‘हम सरकार में शामिल होंगे’ बयान पर प्रतिक्रिया ने उजागर किया भाजपा-AIADMK गठबंधन की अंदरूनी खींचतान
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बाकी है, लेकिन भाजपा और एआईएडीएमके के बीच तालमेल को लेकर अब भी साफ तस्वीर नहीं बन पाई ..
चेन्नई/पुडुचेरी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बाकी है, लेकिन भाजपा और एआईएडीएमके के बीच तालमेल को लेकर अब भी साफ तस्वीर नहीं बन पाई है।
शनिवार को यह तनाव और स्पष्ट हुआ, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने The New Indian Express को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भाजपा गठबंधन सरकार का हिस्सा बनेगी।
जब अमित शाह से पूछा गया कि “क्या भाजपा तमिलनाडु में गठबंधन सरकार में शामिल होगी?” तो उन्होंने सीधा और स्पष्ट जवाब दिया – “हां।”
लेकिन, जब शनिवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) से इस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया।
EPS ने पुडुचेरी में पत्रकारों से कहा
“क्या मैंने पहले ही स्पष्ट नहीं कर दिया है? एआईएडीएमके पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।”
इसके बाद उन्होंने मीडिया से बचते हुए एक “धन्यवाद” कहा और आगे के सवालों को टाल दिया।
AIADMK की दो टूक लाइन
AIADMK पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह भाजपा पर निर्भर नहीं रहना चाहती। जुलाई में पार्टी प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा था:
“हमारे नेता ने यह साफ संदेश दिया है कि हम अपनी सरकार बनाएंगे और हमारी पार्टी को कोई निगल नहीं सकता।”
यह बयान कल्लाकुरिची जिले के उलुंदरपेट में हुई पार्टी बैठक के बाद आया था।
तनावपूर्ण इतिहास और बदलाव
AIADMK और भाजपा का रिश्ता पहले भी तनावपूर्ण रहा है, खासकर जब पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष थे।
- उन्होंने कई बार AIADMK की आलोचना की थी
- यहां तक कि जयललिता की अवैध संपत्ति मामले में दोषसिद्धि का हवाला देकर पार्टी की छवि पर सवाल खड़े किए।
- उन्होंने एक बार यहां तक कहा कि जयललिता भाजपा से भी बेहतर हिंदुत्व नेता थीं और भाजपा अब तमिलनाडु में उस खाली जगह को भरने की कोशिश कर रही है।
इसी के चलते AIADMK ने अन्नामलाई के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। बाद में उन्हें हटाकर 64 वर्षीय नैनार नागेन्द्रन को भाजपा का राज्य अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद दोनों दलों के बीच संबंध फिर से सामान्य होने लगे।
ईडी और आईटी रेड का मुद्दा
जब ईडी और आयकर विभाग ने EPS के रिश्तेदारों के यहां छापेमारी की, तो इस पर भी सवाल उठे कि क्या यह भाजपा का दबाव बनाने का तरीका था।
हालांकि भाजपा नेता नैनार नागेन्द्रन ने कहा कि गठबंधन की पुनर्बहाली सिर्फ पलानीस्वामी से बातचीत के बाद ही संभव हो सकी।
AIADMK के अंदर भी खींचतान
AIADMK के भीतर भी सबकुछ ठीक नहीं है। वरिष्ठ नेता के.ए. सेंगोट्टैयन ने एथिकडवु-अविनाशी परियोजना के लिए आयोजित सम्मान समारोह में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया क्योंकि आमंत्रण पत्रों और बैनरों पर एमजीआर और जयललिता की तस्वीरें नहीं थीं।
अमित शाह की 'ऑपरेशन विजय' रणनीति
अमित शाह ने यह भी कहा है कि वे विजय की पार्टी तमिऴग विजयी कषगम (TVK), रामदास की पीएमके (PMK) और अन्य छोटे दलों को एक मंच पर लाना चाहते हैं।
- EPS ने भी संकेत दिया है कि डीएमके को हराने के लिए वे किसी से भी गठबंधन को तैयार हैं।
- लेकिन थलपति विजय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी भाजपा (वैचारिक शत्रु) या डीएमके (राजनीतिक शत्रु) से कोई गठबंधन नहीं करेगी।
- पीएमके में भी खींचतान जारी है — वरिष्ठ रामदास DMK के साथ जाने के पक्ष में हैं, जबकि उनके बेटे अनबुमणि रामदास भाजपा के साथ जुड़ने की सोच रहे हैं।
टिप्पणी
भले ही भाजपा और AIADMK ने गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर दी हो, लेकिन EPS का सख्त और अस्पष्ट रुख इस बात का संकेत है कि दोनों दलों के बीच विश्वास की कमी और नेतृत्व को लेकर असहमति अब भी बनी हुई है।
भाजपा जहां गठबंधन सरकार में हिस्सेदारी की बात कर रही है, वहीं AIADMK स्पष्ट रूप से अपने दम पर सत्ता में लौटने की रणनीति बना रही है। यह स्थिति आने वाले महीनों में गठबंधन की स्थिरता पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
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