अक्षय तृतीया से पहले सोना ₹51 हजार और चांदी ₹2 लाख तक सस्ती, निवेशकों के लिए अवसर या जोखिम?

अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) से ठीक पहले सोना और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। आमतौर पर वैश्विक तनाव, महंगाई और युद्ध जैसे हालात में इन धातुओं की कीमतें बढ़ती हैं लेकिन इस बार उल्टा रुख देखने को मिल रहा..

अक्षय तृतीया से पहले सोना ₹51 हजार और चांदी ₹2 लाख तक सस्ती, निवेशकों के लिए अवसर या जोखिम?
14-04-2026 - 11:26 AM

अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) से ठीक पहले सोना और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। आमतौर पर वैश्विक तनाव, महंगाई और युद्ध जैसे हालात में इन धातुओं की कीमतें बढ़ती हैं लेकिन इस बार उल्टा रुख देखने को मिल रहा है।

बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोना अपने उच्चतम स्तर ₹2,02,984 प्रति 10 ग्राम से गिरकर करीब ₹1,51,801 पर आ गया है, यानी लगभग ₹51 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चांदी ₹4,39,337 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर से घटकर ₹2,38,720 पर पहुंच गई है, जो करीब ₹2 लाख की कमी को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह बढ़ती ब्याज दरें हैं। US Federal Reserve द्वारा दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना ने निवेशकों को सोने से दूर कर दिया है, क्योंकि यह कोई ब्याज या प्रतिफल नहीं देता। इसके विपरीत, उच्च ब्याज दरों पर बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्प अधिक आकर्षक बन जाते हैं।

हालांकि, वैश्विक स्तर पर जारी तनाव—विशेषकर United States और Iran के बीच टकराव तथा Strait of Hormuz में संकट—की वजह से सोने-चांदी की कीमतों को पूरी तरह गिरने से भी सहारा मिला हुआ है।

चांदी में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इसका कारण यह है कि चांदी एक औद्योगिक धातु भी है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और अन्य उद्योगों में होता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण इसकी मांग पर असर पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। यदि तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो महंगाई में इजाफा होगा, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना और कम हो जाएगी तथा सोने पर दबाव बना रहेगा।

अक्षय तृतीया के मद्देनजर बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक एकमुश्त बड़ी खरीदारी से बचें और चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। उनका कहना है कि वर्तमान स्तर लंबी अवधि के निवेश और पारंपरिक खरीदारी के लिए आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन अल्पकालिक लाभ की उम्मीद करने वालों को सावधानी बरतनी चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में महंगाई के आंकड़े, US Federal Reserve की नीतियां, कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया की स्थिति सोने-चांदी के भाव तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय अवसर के साथ-साथ जोखिम से भी भरा हुआ माना जा रहा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।