Arvind Kejriwal ने दिल्ली आबकारी मामले में जस्टिस कांता से हटने की मांग करते हुए कहा, ‘आप RSS की लीगल विंग के 4 कार्यक्रमों में गईं’

आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख Arvind Kejriwal ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में सुनवाई कर रहीं Justice Swarana Kanta Sharma से खुद को मामले से अलग (recuse) करने की मांग की। उन्होंने कहा, “आप चार बार Akhil Bharatiya Adhivakta Parishad के कार्यक्रमों में गईं, जिसे RSS की लीगल विंग भी कहा जाता है और जिसकी विचारधारा का हम खुलकर विरोध करते ..

Arvind Kejriwal ने दिल्ली आबकारी मामले में जस्टिस कांता से हटने की मांग करते हुए कहा, ‘आप RSS की लीगल विंग के 4 कार्यक्रमों में गईं’
14-04-2026 - 10:48 AM

नयी दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख Arvind Kejriwal ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में सुनवाई कर रहीं Justice Swarana Kanta Sharma से खुद को मामले से अलग (recuse) करने की मांग की। उन्होंने कहा, आप चार बार Akhil Bharatiya Adhivakta Parishad के कार्यक्रमों में गईं, जिसे RSS की लीगल विंग भी कहा जाता है और जिसकी विचारधारा का हम खुलकर विरोध करते हैं। इससे मेरे मन में यह उचित आशंका पैदा होती है कि यह अदालत उनकी ओर अधिक झुकी हुई है।”

सोमवार को हुई सुनवाई में केजरीवाल के साथ उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia ने भी अदालत में अपनी बात रखी। अन्य आरोपमुक्त (discharged) लोगों ने भी CBI की अपील किसी अन्य अदालत में सूचीबद्ध करने की मांग की।

यह ध्यान देने योग्य है कि Central Bureau of Investigation (CBI) ने 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य को आबकारी घोटाले में आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील की है, जो फिलहाल जस्टिस शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध है।

9 मार्च के आदेश पर उठाए सवाल

9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने 23 आरोपियों से CBI की अपील पर जवाब मांगा था और कहा था कि ट्रायल कोर्ट के कुछ निष्कर्ष prima facie (प्रथम दृष्टया) गलत प्रतीत होते हैं। साथ ही, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर रोक लगा दी थी।

केजरीवाल ने इस आदेश को भी चुनौती देते हुए कहा, “9 मार्च का आदेश पढ़कर मेरा दिल बैठ गया। उसी के बाद मुझे अदालत के पक्षपाती होने की गंभीर आशंका हुई। 11 मार्च को मैंने D. K. Upadhyay को पत्र लिखकर आपसे हटने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने कहा कि यह निर्णय जज के विवेक पर निर्भर करता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि 9 मार्च को अदालत में सिर्फ CBI के वकील मौजूद थे और बाकी किसी को उपस्थित रहने का कोई आदेश नहीं था।

ट्रायल कोर्ट के फैसले का हवाला

भरी हुई अदालत में केजरीवाल ने कहा कि 27 फरवरी का ट्रायल कोर्ट का फैसला नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक रोजाना सुनवाई के बाद दिया गया था। उन्होंने कहा, ट्रायल कोर्ट ने करीब 40,000 पन्ने पढ़ने के बाद हमें आरोपमुक्त किया।

लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए’

केजरीवाल ने Ranjit Thakur vs Union of India (1987) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पक्षपात की आशंका का आकलन जज के नहीं, बल्कि पक्षकार के दृष्टिकोण से होना चाहिए।
अगर किसी पक्ष के मन में न्यायाधीश की निष्पक्षता को लेकर उचित आशंका है, तो जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए,” उन्होंने कहा।

उन्होंने Satyendra Jain के मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके मन में यह उचित आशंका है कि फैसला उनके पक्ष में नहीं होगा।

ED और गोवा चुनाव का मुद्दा

केजरीवाल ने कहा कि अदालत के रिकॉर्ड में यह उल्लेख है कि ED अधिकारियों और हवाला ऑपरेटरों के बयानों के अनुसार 45 करोड़ रुपये गोवा चुनाव में उपयोग के लिए भेजे गए, जो कि गलत है।
इस पर जस्टिस शर्मा ने उन्हें केवल recusal के मुद्दे तक सीमित रहने को कहा।

पूर्वनिर्धारित’ होने की आशंका

केजरीवाल ने कहा कि अदालत ने पहले ही मजबूत और निष्कर्षात्मक टिप्पणियां की हैं, जो ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों से पूरी तरह अलग हैं। उन्होंने कहा, इससे यह आशंका पैदा होती है कि अदालत पहले से ही एक निष्कर्ष पर पहुंच चुकी है।

जल्दबाजी के आरोप

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में असामान्य जल्दबाजी दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा, अन्य मामलों में अदालत तीन महीने का समय देती है, लेकिन इस मामले में तेजी दिखाई जा रही है। CBI मुझे दोषी साबित करने की जल्दी में है और अदालत उसकी मांगों को स्वीकार कर रही है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ट्रायल कोर्ट ने जांच अधिकारी की आलोचना की थी, तो CBI उसके बचाव में क्यों आई और उसके खिलाफ कार्रवाई पर रोक क्यों लगाई गई।

RSS कार्यक्रम में भागीदारी पर सवाल

अंत में केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस शर्मा ने RSS की लीगल विंग के चार कार्यक्रमों में भाग लिया, जबकि उनकी पार्टी उस विचारधारा का विरोध करती है।

CBI का पक्ष

इससे पहले CBI ने कहा था कि केवल किसी “लीगल सेमिनार” में भाग लेने के आधार पर जज से हटने की मांग नहीं की जा सकती और इससे किसी वैचारिक जुड़ाव का प्रमाण नहीं मिलता।

पिंजरे का तोता’ टिप्पणी

केजरीवाल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को ‘पिंजरे का तोता’ कहा था, लेकिन इस पिंजरे को नियंत्रित कौन करता है? केंद्र सरकार।”

सिसोदिया की ओर से दलील

सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील Sanjay Hegde ने “Pinochet केस” का हवाला देते हुए कहा कि यूके में एक जज की पत्नी के Amnesty International से जुड़े होने के कारण फैसला रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा, अगर थोड़ी सी भी आशंका हो, तो जज का अलग हो जाना बेहतर होता है, वरना पूरा फैसला रद्द हो सकता है।

सरकार का जवाब

वहीं, सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने हाईकोर्ट से इन याचिकाओं को सख्ती से खारिज करने की अपील की और इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।