“दिन के उजाले जितना स्पष्ट”..हाई कोर्ट ने अमृतपाल की NSA हिरासत को न्यायिक समीक्षा से बाहर बताया
अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला “दिन के उजाले जितना स्पष्ट” है और इस तरह की निवारक हिरासत न्यायिक समीक्षा के दायरे से..
अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला “दिन के उजाले जितना स्पष्ट” है और इस तरह की निवारक हिरासत न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खुले न्यायालय में आदेश सुनाते हुए कहा, “यह बिल्कुल स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित निवारक हिरासत का आदेश न्यायिक समीक्षा की शक्तियों से परे है इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है।”
याचिका में अमृतपाल सिंह ने अपनी हिरासत को “मनमानी, अधिकार क्षेत्र से बाहर और संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन” बताया था। उनके वकील ने दलील दी कि अप्रैल 2023 से वह लगातार निवारक हिरासत में हैं, जबकि उनकी निरंतर कैद के समर्थन में कोई ठोस सामग्री मौजूद नहीं है।
पीठ को यह भी बताया गया कि हिरासत से पहले अमृतपाल सिंह सामाजिक सुधार गतिविधियों में सक्रिय थे। इनमें युवाओं के लिए नशामुक्ति कार्यक्रम, ड्रग्स के खिलाफ अभियान और अपनी संस्था वारिस पंजाब दे के माध्यम से सामुदायिक कार्य शामिल थे। याचिका में कहा गया कि उनके भाषण सिख मूल्यों, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर केंद्रित थे, न कि अलगाववाद या हिंसा पर।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर निवारक हिरासत को उचित नहीं ठहराया जा सकता, खासकर जब सक्षम अदालतों में नियमित आपराधिक कार्यवाही पहले से चल रही हो। उन्होंने कहा कि प्रत्येक FIR की अलग-अलग सुनवाई हो रही है और ऐसा कोई समग्र पैटर्न या तात्कालिक खतरा नहीं दिखाया गया, जो NSA लगाने को उचित ठहराए।
याचिका में यह भी कहा गया कि नवीनतम हिरासत आदेश 10 अक्टूबर 2024 को दर्ज एक FIR पर आधारित है। अमृतपाल सिंह ने दावा किया कि उस FIR में उनका नाम नहीं था और 18 अक्टूबर 2024 की एक DDR के जरिए बाद में जोड़ा गया। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत दायर अंतिम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उनके खिलाफ “जरा सा भी सबूत” नहीं है, फिर भी उन्हें डिब्रूगढ़ केंद्रीय जेल में रखा गया है।
उन्होंने यह भी खारिज किया कि उनका किसी राष्ट्र-विरोधी तत्व से संबंध है या वह किसी व्यक्ति की हत्या की साजिश का हिस्सा हैं। उनके अनुसार ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सामग्री नहीं है।
वहीं, राज्य सरकार ने “हिट लिस्ट” से उत्पन्न खतरे की गंभीरता का हवाला देते हुए निवारक हिरासत का बचाव किया। अदालत को बताया गया कि अमृतपाल सिंह के “खतरनाक आतंकवादियों और गैंगस्टरों से करीबी संबंध” हिरासत आदेश का मुख्य आधार हैं।
राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने कहा कि हिरासत के मुख्य आधार दो हैं—15 सदस्यों की एक “हिट लिस्ट” और याचिकाकर्ता की प्रतिबंधित आतंकवादियों से कथित नजदीकी, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत नामित व्यक्ति भी शामिल हैं।
उन्होंने अदालत में कहा, “अगर मुझे हिरासत के आधार को एक पंक्ति में बताना हो, तो वह इस हिट लिस्ट से उत्पन्न खतरे की गंभीरता और याचिकाकर्ता के आतंकवादियों व गैंगस्टरों से करीबी संबंध हैं।” केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन और अधिवक्ता धीरज जैन ने पक्ष रखा।
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