मोदी लॉन्च से पहले राजस्थान रिफाइनरी में लगी आग, ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर नहीःविशेषज्ञ
एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) परिसर में सोमवार को लगी भीषण आग से अस्थायी बाधा जरूर उत्पन्न हुई है लेकिन ईंधन आपूर्ति पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिफाइनरी अभी व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं..
एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) परिसर में सोमवार को लगी भीषण आग से अस्थायी बाधा जरूर उत्पन्न हुई है लेकिन ईंधन आपूर्ति पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिफाइनरी अभी व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं कर पाई थी।
तेल बाजार विश्लेषक कंपनी क्प्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, “बाजार के नजरिए से इसका प्रभाव सीमित है। रिफाइनरी अभी उत्पाद आपूर्ति में योगदान नहीं दे रही थी और वास्तविक उत्पादन 2026 की तीसरी तिमाही से अपेक्षित था।”
उन्होंने बताया कि रिफाइनरी फिलहाल ‘कमीशनिंग फेज’ में थी, जिसमें विभिन्न यूनिट्स का परीक्षण किया जाता है। इस दौरान केवल इंटरमीडिएट उत्पाद बन रहे थे, न कि पेट्रोल, डीजल या एटीएफ जैसे तैयार ईंधन।
क्या है परियोजना की खासियत?
HRRL भारत की बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजनाओं में से एक है, जो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की पारादीप रिफाइनरी (2016) के बाद स्थापित की जा रही है।
- क्षमता: 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA)
- स्थान: बाड़मेर तेल क्षेत्र के पास
- उद्देश्य: लॉजिस्टिक लागत कम करना, पेट्रोकेमिकल उत्पादन बढ़ाना, आयात निर्भरता घटाना
सरकार ने पहले संकेत दिया था कि 1 जुलाई से इसका व्यावसायिक संचालन शुरू हो सकता है।
आग कैसे लगी?
यह हादसा 20 अप्रैल को क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में हुआ, जो रिफाइनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट होती है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसार,
- हीट एक्सचेंजर सर्किट के एक वाल्व/फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन लीक हुआ
- इसी रिसाव के कारण आग लगी
दोपहर में लगी इस आग को बुझाने के लिए कई फायर टेंडर तैनात किए गए। राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
जांच और सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जांच टीम गठित की है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद ही नुकसान और मरम्मत की समयसीमा स्पष्ट होगी।
यह हादसा ऐसे समय हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले दिन रिफाइनरी का उद्घाटन करना था। अब उनका दौरा अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।
आपूर्ति पर असर क्यों नहीं?
विशेषज्ञों के अनुसार..
- रिफाइनरी अभी उत्पादन चरण में नहीं थी
- दिसंबर 2025 से लाया गया कच्चा तेल अन्य रिफाइनरियों (मुंबई, विशाखापत्तनम) भेजा जा चुका है
- इससे बाजार में आपूर्ति बनी हुई है
वैश्विक स्तर पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है, जिसमें वेनेजुएला, पश्चिम अफ्रीका और रूस से आयात शामिल हैं।
लंबी देरी के बाद बना प्रोजेक्ट
करीब 80,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना 2013 में शुरू हुई थी, लेकिन लागत वृद्धि और अन्य चुनौतियों के कारण इसमें देरी हुई।
- 2013: यूपीए सरकार के दौरान घोषणा
- 2017: वसुंधरा राजे सरकार ने पुनर्जीवित किया
- 2018: प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से शिलान्यास किया
यह परियोजना एचपीसीएल और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें HPCL की 74% और राज्य सरकार की 26% हिस्सेदारी है।
निष्कर्ष
हालांकि यह आग परियोजना के लिए एक झटका है और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है, लेकिन चूंकि रिफाइनरी अभी उत्पादन शुरू नहीं कर पाई थी, इसलिए देश की ईंधन आपूर्ति पर इसका तत्काल कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
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