400 करोड़ रुपये से शून्य तक: बजट 2026 में आवंटन घटने के बाद ईरान ने कहा, चाबहार बंदरगाह पर भारत के साथ बातचीत के लिए अभी भी खुले हैं
केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटन घटाए जाने के बाद ईरान ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर नई दिल्ली के साथ काम करने और संबंधों के विस्तार के लिए अब भी तैयार है। शुक्रवार को ईरानी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ से पहले ईरानी दूतावास में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहअली ने बंदरगाह के रणनीतिक स्थान को रेखांकित ..
केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटन घटाए जाने के बाद ईरान ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर नई दिल्ली के साथ काम करने और संबंधों के विस्तार के लिए अब भी तैयार है। शुक्रवार को ईरानी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ से पहले ईरानी दूतावास में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहअली ने बंदरगाह के रणनीतिक स्थान को रेखांकित किया और इसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की ईरान की क्षमता का अहम हिस्सा बताया।
वित्त वर्ष 2024-25 में बजट के तहत विदेश मंत्रालय को चाबहार बंदरगाह के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, और यह राशि ईरान को स्थानांतरित भी कर दी गई थी। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद बंदरगाह के भविष्य को लेकर भारत ने अभी तक अपनी आगे की योजनाओं पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
फतहअली ने कहा, “आप जानते हैं कि चाबहार बंदरगाह बेहद महत्वपूर्ण है और यह अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुंच के लिए एक अहम भूमिका निभा सकता है। हमारे कुछ देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, विशेष रूप से भारत के साथ, और हमारा मानना है कि इस मुद्दे पर हमें अपने संबंधों का विस्तार करना चाहिए।”
ओमान की खाड़ी पर स्थित इस गहरे पानी वाले बंदरगाह के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि चाबहार, चाबहार ही है, इसका स्थान नहीं बदलेगा, और कुछ देश इस भौगोलिक स्थिति का उपयोग मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए करते हैं।”
उन्होंने बिना ज्यादा विवरण दिए कहा, “हमें विश्वास है कि भविष्य में भारतीय सरकार इस स्थिति का प्रबंधन करना चाहेगी।”
बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए कोई आवंटन नहीं
भारत ने केंद्रीय बजट 2026-27 में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई बजटीय आवंटन नहीं किया है, जो हाल के वर्षों की परंपरा से हटकर है। इससे पहले के बजटों में भारत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस रणनीतिक कनेक्टिविटी परियोजना के लिए हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करता रहा था।
यह फैसला ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद लिया गया है। पिछले साल सितंबर में वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की थी, हालांकि उसने चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।
मामले से परिचित अधिकारियों ने बताया कि भारत परियोजना के लिए प्रतिबद्ध लगभग 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में है, ताकि बंदरगाह के विकास में उसकी प्रत्यक्ष भागीदारी (एक्सपोजर) कम की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक नई इकाई (एंटिटी) बनाने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इस व्यवस्था के तहत भारतीय सरकार की सीधी भागीदारी समाप्त हो जाएगी, जबकि बंदरगाह को समर्थन जारी रहेगा।
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