‘हम बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे’: ईरान को ट्रंप की चेतावनी, व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने इंटरनेट बंद किया ..

ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ गुरुवार को तेज़ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने देश के बड़े हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं और टेलीफोन लाइनें बंद कर दी हैं। संचार पर लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि अधिकारी उपग्रह सिग्नलों में भी दखल..

‘हम बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे’: ईरान को ट्रंप की चेतावनी, व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने इंटरनेट बंद किया ..
09-01-2026 - 10:05 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

वॉशिंगटन। ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ गुरुवार को तेज़ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने देश के बड़े हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं और टेलीफोन लाइनें बंद कर दी हैं। संचार पर लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि अधिकारी उपग्रह सिग्नलों में भी दखल दे सकते हैं, ताकि अशांति की तस्वीरें और वीडियो बाहरी दुनिया तक न पहुंच सकें।

सरकारी दमन के बीच निर्वासन में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने ईरानी सरकार की तीखी आलोचना की और उस पर जानबूझकर लाखों ईरानियों की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया, जो राजनीतिक और आर्थिक बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कड़ी भाषा में पोस्ट करते हुए पहलवी ने लिखा, “आज रात लाखों ईरानियों ने अपनी आज़ादी की मांग की। इसके जवाब में ईरानी शासन ने संचार के सभी रास्ते बंद कर दिए। इंटरनेट बंद कर दिया गया, लैंडलाइन काट दी गईं और संभव है कि सैटेलाइट सिग्नलों को भी जाम करने की कोशिश की जाए।”

पहलवी ने आरोप लगाया कि बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बीच आज़ादी की मांग कर रहे नागरिकों को चुप कराने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निर्णायक हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि “ईरानी जनता की आवाज़ और इच्छाशक्ति को दुनिया के सामने लाने के लिए उपलब्ध सभी तकनीकी, वित्तीय और कूटनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

ट्रंप की सराहना, यूरोप से कार्रवाई की अपील

रज़ा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुले तौर पर सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरानी नेतृत्व के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। साथ ही उन्होंने यूरोपीय नेताओं से भी अमेरिका के कदमों का अनुसरण करने की अपील की।

उन्होंने कहा, “मैं स्वतंत्र विश्व के नेता, राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने शासन को जवाबदेह ठहराने के अपने वादे को दोहराया है। अब समय आ गया है कि यूरोपीय नेता भी चुप्पी तोड़ें और ईरान की जनता के समर्थन में अधिक निर्णायक कदम उठाएं।”

प्रदर्शनकारियों की हत्या पर ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल करते हैं, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे।

रूढ़िवादी रेडियो होस्ट ह्यू हेविट को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “मैंने उन्हें साफ बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं जैसा कि वे अपने दंगों के दौरान अक्सर करते हैं तो हम बहुत कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

इससे पहले ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा था, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है, जैसा कि उसकी आदत रही है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। हम पूरी तरह तैयार हैं।”

हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका किस तरह की कार्रवाई करेगा। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाता रहा है और प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचता आया है, लेकिन जून में उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हवाई हमलों का आदेश दिया था।

अमेरिकी अधिकारियों का समर्थन

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति अमेरिका के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका उन सभी लोगों के साथ खड़ा है जो बुनियादी स्वतंत्रताओं की मांग कर रहे हैं।

वेंस ने कहा, “हम निश्चित रूप से उन सभी के साथ हैं जो शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, जो अपनी आवाज़ उठाने और स्वतंत्र रूप से संगठित होने का अधिकार चाहते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान के नेतृत्व को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ गंभीर बातचीत करनी चाहिए।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से फ़ारसी भाषा में एक असामान्य रूप से सख्त चेतावनी जारी की। पोस्ट में लिखा गया,
राष्ट्रपति ट्रंप कार्रवाई करने वाले व्यक्ति हैं। अगर आपको पहले नहीं पता था, तो अब पता चल गया होगा। राष्ट्रपति ट्रंप से पंगा मत लीजिए।”

देशभर में फैले विरोध प्रदर्शन

यह अशांति 28 दिसंबर को शुरू हुई थी, जब तेहरान के दुकानदारों ने ईरानी रियाल के मूल्य में एक और तेज़ गिरावट के खिलाफ प्रदर्शन किया। पिछले एक साल में ईरानी मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों के साथ-साथ लंबे समय से चली आ रही बदइंतजामी और भ्रष्टाचार के कारण महंगाई करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

जल्द ही विश्वविद्यालयों के छात्र भी इन प्रदर्शनों में शामिल हो गए और विरोध पूरे देश के विभिन्न प्रांतों में फैल गया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाते हुए और कुछ मामलों में रज़ा पहलवी के समर्थन में आवाज़ उठाते हुए सुना गया।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी  के अनुसार, सभी 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी का दावा है कि अब तक कम से कम 34 प्रदर्शनकारियों और चार सुरक्षा कर्मियों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बीबीसी फ़ारसी ने 21 लोगों की मौत और उनकी पहचान की पुष्टि की है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पांच सुरक्षा कर्मियों की मौत को स्वीकार किया है।

2022 के बाद से यह ईरान में देखी गई सबसे बड़ी अशांति मानी जा रही है। गहराते आर्थिक संकट, मुद्रा पतन और बढ़ती नागरिक अवज्ञा के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में गोलियों की आवाज़, आंसू गैस और पथराव के दृश्य देखे गए हैं।

जैसे-जैसे संचार पर पाबंदियां सख्त होती जा रही हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है, ईरान के भीतर हालात बेहद अस्थिर बने हुए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनकारियों और शासन के बीच यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।