आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या से हिला हरियाणा प्रशासन, जांच को प्रभावित कर सकने वाले अफसरों को हटाने की मांग तेज़

आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या ने हरियाणा की नौकरशाही में गहरे मतभेद उजागर कर दिए हैं। अधिकारी वर्ग के एक बड़े हिस्से में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अविश्वास पनप गया है, खासकर तब जब पूरन कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर..

आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या से हिला हरियाणा प्रशासन, जांच को प्रभावित कर सकने वाले अफसरों को हटाने की मांग तेज़
11-10-2025 - 01:15 PM

गुरुग्राम। आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या ने हरियाणा की नौकरशाही में गहरे मतभेद उजागर कर दिए हैं। अधिकारी वर्ग के एक बड़े हिस्से में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अविश्वास पनप गया है, खासकर तब जब पूरन कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) के अधिकारियों ने खुलकर पूरन कुमार के परिवार के समर्थन में आवाज़ उठाई है और मांग की है कि उन सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटाया जाए जो आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या की जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इसी बीच, कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी—खासकर अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आने वाले—भी इस बात से नाराज़ हैं कि एक युवा आईपीएस अधिकारी को शीर्ष पदों पर बैठे कुछ लोगों की राजनीति के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।

7 अक्टूबर को आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार ने आत्महत्या कर ली थी। उनके कथित सुसाइड नोट में हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया पर झूठे भ्रष्टाचार के मामले में फंसाने का आरोप लगाया गया है। 52 वर्षीय अधिकारी ने अपने नोट में 13 अन्य वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के नाम भी लिखे, जिन पर उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी जाति (अनुसूचित जाति) के कारण अपमानित और प्रताड़ित किया गया।

शुक्रवार देर रात पूरन कुमार का पोस्टमार्टम उनके परिवार की सहमति से हुआ। इससे पहले हरियाणा की गृह सचिव सुमिता मिश्रा ने अमनीत के घर जाकर उन्हें निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया।

झूठे मामलों की एक श्रृंखला’

गुरुवार को हरियाणा कैडर के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी डी. सुरेश (हैदराबाद निवासी) ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को बताया कि डीजीपी शत्रुजीत कपूर के कार्यभार संभालने के बाद से (2020 में हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख बनने के बाद) दलित और आर्थिक रूप से कमजोर अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।

डी. सुरेश ने कहा, “मैं दिल्ली में हरियाणा सरकार का रेज़िडेंट कमिश्नर हूं और जब भी मुख्यमंत्री यहां आते हैं, मैं उनका स्वागत करता हूं। मैंने उन्हें बताया कि किस तरह एससी समुदाय या कमजोर वर्ग के अधिकारियों को झूठे सबूत गढ़कर फंसाया जा रहा है।”

सुरेश ने आरोप लगाया कि डीजीपी कपूर जानबूझकर ऐसे अधिकारियों को टारगेट करते हैं क्योंकि वे पलटवार करने की स्थिति में नहीं होते, और इससे वह खुद को “भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अधिकारी” के रूप में पेश करते हैं।

उन्होंने बुधवार को हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी से भी मुलाकात की और स्पष्ट कहा कि कपूर और बिजारनिया की गिरफ्तारी से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा।

डी. सुरेश ने बताया कि जिस एफआईआर के कारण वाई. पूरन कुमार ने आत्महत्या की, वह भी उन्हें झूठे मामले में फंसाने के लिए दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की स्थिति में मानक प्रक्रिया (SOP) यह होती है कि पहले प्रारंभिक जांच (PE) की जाती है और केवल प्राथमिक साक्ष्य मिलने पर मामला मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के संज्ञान में लाया जाता है। उन्होंने कहा, लेकिन हरियाणा पुलिस और राज्य विजिलेंस ब्यूरो (अब एंटी करप्शन ब्यूरो) ने बिना सरकारी अनुमति के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी।

गौरतलब है कि डी. सुरेश भी कपूर-नेतृत्व वाले विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। 2020 में ब्यूरो ने उन पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण - HSVP) को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था, क्योंकि उन्होंने 2019 में गुरुग्राम के एक स्कूल को 1993 की दरों पर प्लॉट पुनः आवंटित किया था।

इसके बाद, केंद्रीय सूचना आयुक्त विजय वर्धन ने पिछले वर्ष अप्रैल में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे सुरेश को उनके खिलाफ की गई जांच और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत ली गई स्वीकृतियों की जानकारी दें।

कानूनी प्रावधानों की अनदेखी

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में 2018 में जोड़ा गया धारा 17A यह प्रावधान करती है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के आधिकारिक कार्यों या सिफारिशों पर जांच या जांच-पड़ताल बिना पूर्व स्वीकृति के नहीं की जा सकती।
एक वरिष्ठ एससी समुदाय के आईएएस अधिकारी ने बताया कि “हरियाणा में इस प्रावधान की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।”

उन्होंने कहा कि दलित और कमजोर वर्ग के अधिकारी विजिलेंस ब्यूरो के आसान निशाने बन जाते हैं ताकि ब्यूरो अपनी “भ्रष्टाचार विरोधी उपलब्धियों” को उजागर कर सके। वहीं, जिन अधिकारियों ने भारी संपत्ति, निजी गेस्ट हाउस या गुरुग्राम जैसी जगहों पर आलीशान मकान बना लिए हैं, उन्हें “ईमानदार” के रूप में पेश किया जाता है।

निष्पक्ष जांच’ की मांग

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हाल के वर्षों में कमजोर तबके के अधिकारियों को फंसाने के लिए गुमनाम और झूठी शिकायतें दर्ज करना एक सामान्य प्रवृत्ति बन गई है। इन मामलों में झूठे एफआईआर, सीधी गिरफ्तारी और मानसिक प्रताड़ना जैसे तरीके अपनाए जाते हैं, ताकि एससी, ओबीसी और अन्य कमजोर वर्गों में डर पैदा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि फर्जी सबूत और व्हाट्सएप चैट जैसी चीजें “जांच” के नाम पर आधार बना दी जाती हैं, बिना किसी सत्यापन के।

हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) के 2016 बैच के अधिकारी शंभु, जो वर्तमान में कुरुक्षेत्र में जिला परिषद सीईओ हैं और एचसीएस (कार्यपालिका शाखा) संघ के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि संघ ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को ज्ञापन सौंपा है।
इसमें मांग की गई है कि उन सभी अधिकारियों को अस्थायी रूप से पद से हटाया जाए जिनके पास जांच को प्रभावित करने की शक्ति है।

शंभु ने बताया कि ज्ञापन में स्पष्ट लिखा गया है, न्यायहित में आवश्यक है कि उन सभी अधिकारियों को, जिनका नाम एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज है, अस्थायी रूप से ऐसे पदों से हटाया जाए जहाँ से वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “हम किसी अधिकारी के खिलाफ नहीं हैं, बस यही चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो।” संघ ने मुख्यमंत्री से मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।