महाराष्ट्र के आश्रम स्कूल में दो छात्रों ने लगाई फांसी, हाईकोर्ट ने उठाए सुरक्षा खामियों पर सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के आवासीय आदिवासी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की, जब पालघर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ दो नाबालिग छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या..

महाराष्ट्र के आश्रम स्कूल में दो छात्रों ने लगाई फांसी, हाईकोर्ट ने उठाए सुरक्षा खामियों पर सवाल
11-10-2025 - 01:13 PM

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के आवासीय आदिवासी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की, जब पालघर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ दो नाबालिग छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।

बुधवार देर रात, वाडा तहसील के एक अनुदानित माध्यमिक आश्रम स्कूल के दो छात्रों ने अंबिस्ते स्थित एक निजी आश्रमशाला के छात्रावास परिसर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मृत छात्रों की पहचान देविदास परशुराम नवले (कक्षा 10, निवासी – मोकhada-बिवालपाड़ा) और मनोज सीताराम वाड (कक्षा 9, निवासी – दप्ती) के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों ने कपड़े सुखाने वाली रस्सी का उपयोग कर अपनी जान ली।

इस घटना ने पूरे आदिवासी बहुल पालघर जिले में सनसनी फैला दी है और आदिवासी बच्चों के लिए चलने वाले आवासीय स्कूलों में सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रेवती मोहिटे डेरे और संदीश पाटिल की खंडपीठ ने बच्चों की सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के पालन से जुड़ी स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि क्या उस स्कूल में सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू थे जहाँ यह दुखद घटना हुई।
न्यायालय ने कहा, “हमने आज अखबार में पढ़ा कि पालघर के एक स्कूल में दो बच्चों ने आत्महत्या की। क्या यह मामला उन दिशा-निर्देशों के दायरे में आता है? उस स्कूल में क्या सुरक्षा इंतज़ाम थे?”

उल्लेखनीय है कि मई 2025 में जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य महाराष्ट्र के सभी सरकारी, निजी, अनुदानित और गैर-अनुदानित स्कूलों को बच्चों के लिए “सुरक्षित क्षेत्र” बनाना था। ये नियम पिछले साल बद्लापुर के एक स्कूल में दो छात्राओं के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले के बाद लागू किए गए थे।

अतिरिक्त लोक अभियोजक प्राजक्ता शिंदे ने अदालत को आश्वस्त किया कि आदिवासी जिलों में स्थित आश्रमशालाएं (आवासीय विद्यालय) भी इन सुरक्षा दिशा-निर्देशों के दायरे में आती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अभिभावक राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी भी स्कूल की सुरक्षा अनुपालन स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने वेबसाइट की विस्तार से समीक्षा की और राज्य सरकार को अतिरिक्त जानकारी जोड़ने के निर्देश दिए। शिंदे ने अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर तक सभी अनुपालन विवरण अपडेट कर दिए जाएंगे और आगे चलकर संबंधित विभाग प्रत्येक माह स्कूलों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेगा।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के सभी अभिभावकों को इस वेबसाइट की जानकारी दी जाए ताकि वे यह जांच सकें कि उनके बच्चों के स्कूल में सुरक्षा उपायों का पालन किया जा रहा है या नहीं। साथ ही, यह भी बताया जाए कि अगर कोई स्कूल इन मानकों का उल्लंघन करता है तो शिकायत कैसे दर्ज कराई जा सकती है।

न्यायालय ने राज्य सरकार के अब तक के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने कहा, “वेबसाइट को उन्नत करने में समय लगेगा, लेकिन अब तक किया गया कार्य सराहनीय है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।