ईरानी राजदूत ने संयम की अपील पर भारत की सराहना करते हुए कहा, “भारत निभा सकता है बेहद प्रभावी भूमिका..”
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें सप्ताह में पहुंच चुका है। इसी बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में भारत “बेहद प्रभावी भूमिका” निभा..
नयी दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें सप्ताह में पहुंच चुका है। इसी बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में भारत “बेहद प्रभावी भूमिका” निभा सकता है।
एक मीडिया साक्षात्कार में राजदूत ने कहा कि भारत द्वारा संवाद और संयम की अपील “सराहनीय और जिम्मेदार” रुख है। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि भारत जैसे देशों की भूमिका इन परिस्थितियों में काफी प्रभावी हो सकती है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को उम्मीद है कि सभी स्वतंत्र और आजादी पसंद देश संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की “आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों” की स्पष्ट निंदा करेंगे। उनके अनुसार, इन कार्रवाइयों ने ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है और स्कूल, विश्वविद्यालय, अस्पताल, रिहायशी इलाकों तथा आर्थिक ढांचे जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।
“ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा”
राजदूत फथाली ने कहा कि ईरान ने कभी युद्ध शुरू करने की इच्छा नहीं जताई। उन्होंने कहा, “अगर हम पर युद्ध थोपा गया, तो उसके अंत—समय, दायरा और क्षेत्र—का नियंत्रण ईरान के हाथ में होगा। अभी जो हो रहा है, वह बाहरी आक्रमण के खिलाफ वैध आत्मरक्षा है।”
चाबहार पोर्ट पर क्या कहा?
चाबहार पोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े क्षेत्रीय प्रोजेक्ट्स को एकतरफा प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे “रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट” बताते हुए कहा कि यह विशेष रूप से भारत को मध्य एशिया तक पहुंच देने में अहम भूमिका निभाता है।
राजदूत ने बताया कि इस मुद्दे पर ईरान और भारत के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है और सहयोग जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाहरी दबावों के बावजूद इस परियोजना का काम बिना रुकावट आगे बढ़ेगा।
“अमेरिका-इज़राइल अपने लक्ष्य हासिल करने में विफल”
राजदूत ने दावा किया कि रणनीतिक स्तर पर अमेरिका और इज़राइल अपने शुरुआती लक्ष्यों को हासिल करने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां वे “रेजीम चेंज” जैसी उम्मीदों के साथ आगे बढ़े थे, वहीं वास्तविकता इसके उलट रही है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने ईरान के भीतर एकजुटता बढ़ाई है और जनता ने सरकार के समर्थन में मजबूती दिखाई है।
ट्रंप के रुख में बदलाव का जिक्र
राजदूत ने डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि पहले वे शासन परिवर्तन की बात कर रहे थे, लेकिन अब उनका ध्यान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर है।
उन्होंने इसे अमेरिकी नीतियों में “गलत आकलन” का परिणाम बताया।
BRICS की भूमिका पर जोर
राजदूत फथाली ने BRICS को एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच बताते हुए कहा कि यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने BRICS देशों से अपील की कि वे मौजूदा हालात पर जिम्मेदार रुख अपनाएं, अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करें, एकतरफा नीतियों का विरोध करें और क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद करें।
बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच टकराव दूसरे महीने में पहुंच चुका है, जिसमें नागरिक, ऊर्जा और सैन्य ढांचे पर हमले जारी हैं।
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