अमित जोगी को 2003 हत्या मामले में उम्रकैद, हाईकोर्ट ने 2011 का फैसला क्यों बदला?
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 के चर्चित हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामअवतार जग्गी की हत्या के मामले में यह फैसला..
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 के चर्चित हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामअवतार जग्गी की हत्या के मामले में यह फैसला सुनाया। आदेश 2 अप्रैल को पारित हुआ था, जिसे सोमवार को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को दी गई बरी (acquittal) को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “पूरी तरह अवैध, गलत, साक्ष्यों के विपरीत और बिना ठोस आधार के” था।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी।
हत्या कब हुई थी?
रामअवतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी, जब उस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की, लेकिन राजनीतिक विवाद के बाद इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया। CBI ने अपनी चार्जशीट में अमित जोगी समेत कई आरोपियों को नामजद किया था।
2007 और 2011 में क्या हुआ था?
31 मई 2007 को रायपुर की ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित माने, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बाद CBI ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन 2011 में हाईकोर्ट ने देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी।
छत्तीसगढ़ सरकार और मृतक के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गई थीं।
हाईकोर्ट ने 2011 का फैसला दोबारा क्यों देखा?
दरअसल, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह CBI की उस याचिका पर फिर से विचार करे, जिसमें अमित जोगी की बरी के खिलाफ अपील दाखिल करने की अनुमति मांगी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू की। दोबारा सुनवाई में अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला साक्ष्यों के अनुरूप नहीं था, इसलिए उसे रद्द करते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया गया।
मामला क्यों अहम है?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्या से जुड़ा है और इसमें लंबे समय बाद न्यायिक प्रक्रिया ने नया मोड़ लिया है। साथ ही, यह दिखाता है कि उच्च न्यायालय पुराने फैसलों की पुनर्समीक्षा कर सकता है, यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देश दिया जाए और पर्याप्त आधार मौजूद हो।
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