सहयोगी देशों पर जमकर बरसे ट्रंप और कहा, ‘जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और नाटो ने हमारी मदद नहीं की..’
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के सहयोगी देशों पर तीखा हमला बोला है। व्हाइट हाउस में सोमवार, 6 अप्रेल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि कई प्रमुख सहयोगी देशों ने अमेरिका का साथ नहीं ..
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के सहयोगी देशों पर तीखा हमला बोला है। व्हाइट हाउस में सोमवार, 6 अप्रेल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि कई प्रमुख सहयोगी देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया।
ट्रंप ने कहा, “जापान ने हमारी मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने हमारी मदद नहीं की, दक्षिण कोरिया ने हमारी मदद नहीं की, और फिर आप नाटो पर आते हैं—नाटो ने भी हमारी कोई मदद नहीं की।”
उन्होंने विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा, “हमने जापान में 50,000 सैनिक तैनात कर रखे हैं ताकि उन्हें उत्तर कोरिया से बचाया जा सके। इसी तरह दक्षिण कोरिया में 45,000 सैनिक हैं, ताकि हम किम जोंग उन से अपनी सुरक्षा कर सकें।”
खाड़ी देशों की तारीफ
ट्रंप ने कुछ खाड़ी देशों की भूमिका की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के करीब होने के कारण इन देशों ने बेहतर सहयोग दिया। उन्होंने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत को “बेहतरीन” बताया।
ग्रीनलैंड विवाद और नाटो से टकराव
नाटो के साथ तनाव पर ट्रंप ने कहा कि इसकी शुरुआत ग्रीनलैंड विवाद से हुई। उन्होंने कहा, “अगर आप सच्चाई जानना चाहते हैं, तो सब कुछ ग्रीनलैंड से शुरू हुआ। हम ग्रीनलैंड चाहते हैं लेकिन वे हमें देना नहीं चाहते। मैंने कहा,‘बाय-बाय’।”
ट्रंप ने नाटो को “कागजी शेर” बताते हुए कहा कि इस गठबंधन की जरूरत नहीं है क्योंकि उसने किसी तरह की मदद नहीं की।
इटली ने रोकी अमेरिकी उड़ान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने इटली सरकार ने अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति नहीं दी थी।
बताया गया कि यह फैसला केवल भू-राजनीतिक सतर्कता के कारण नहीं बल्कि प्रक्रियात्मक कारणों से भी लिया गया क्योंकि अमेरिका ने कथित तौर पर पहले से अनुमति नहीं ली थी और न ही इटली के सैन्य नेतृत्व से आवश्यक परामर्श किया था।
बढ़ता वैश्विक तनाव
ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष जारी है। इस बीच सहयोगी देशों के साथ मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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