आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: "भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर कोई छेड़ेगा तो सबक सिखाना आता है"
दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राजस्थान के हरमाड़ा स्थित गुरु राविनाथ आश्रम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन यदि कोई भारत को छेड़ेगा तो उसे सबक सिखाने की ताकत भी रखता है..
जयपुर/नयी दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को राजस्थान के हरमाड़ा स्थित गुरु रविनाथ आश्रम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन यदि कोई भारत को छेड़ेगा तो उसे सबक सिखाने की ताकत भी रखता है।
मोहन भागवत के वक्तव्य की मुख्य बातें
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विषय |
वक्तव्य |
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शांति और ताकत |
"भारत का किसी से बैर नहीं है, लेकिन अगर कोई छेड़ेगा तो भारत उसे सबक सिखा सकता है और यह ताकत होनी भी चाहिए।" |
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विश्व कल्याण |
"भारत विश्व शांति और कल्याण के लिए समर्पित है। लेकिन दुनिया ताकत की भाषा ही समझती है।" |
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हिंदू धर्म का दायित्व |
"विश्व कल्याण ही हमारा धर्म है। यह विशेषकर हिंदू धर्म का कर्तव्य है।" |
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भारत की भूमिका |
"भारत एक बड़े भाई की तरह है, जो हमेशा शांति और सौहार्द के लिए काम करता है।" |
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पड़ोसी देशों की मदद |
"श्रीलंका, नेपाल और मालदीव जब संकट में थे, तब सबसे पहले भारत ही उनकी मदद को आगे आया।" |
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बलिदान की परंपरा |
"हम भगवान श्रीराम से लेकर भामाशाह तक सभी का सम्मान करते हैं, जिन्होंने त्याग किया।" |
ऑपरेशन सिन्दूर: पृष्ठभूमि
- 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
- यह ऑपरेशन 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद किया गया, जिसमें 22 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे।
भागवत का संदेश क्या संकेत करता है?
- यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
- हिंदुत्व के वैश्विक कल्याण दृष्टिकोण को सामने लाता है।
- नरम कूटनीति और सख्त सैन्य विकल्पों का संतुलन रखने की सोच को रेखांकित करता है।
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