होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सख्त, ईरानी राजदूत तलब
Ministry of External Affairs (MEA) ने Iran के राजदूत Dr Mohammad Fathali को तलब कर Strait of Hormuz में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज..
नयी दिल्ली। Ministry of External Affairs (MEA) ने Iran के राजदूत Dr Mohammad Fathali को तलब कर Strait of Hormuz में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विदेश सचिव Vikram Misri ने बैठक के दौरान इस घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से कहा कि वह भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया जल्द बहाल करे।
Our statement regarding Iran
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MEA के बयान के अनुसार, नयी दिल्ली में ईरान के राजदूत को बुलाकर इस मामले पर चर्चा की गई और भारत की स्थिति से अवगत कराया गया। राजदूत ने आश्वासन दिया कि वे इन चिंताओं को तेहरान में संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी
रिपोर्ट के मुताबिक, Islamic Revolutionary Guard Corps की ओर से गोलीबारी की खबरों के बाद दो भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से वापस लौटना पड़ा। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब ईरान ने एक दिन पहले जलडमरूमध्य को खोलने के बाद फिर से प्रतिबंध लगा दिए।
जहाज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार, इनमें से एक भारतीय ध्वज वाला सुपरटैंकर लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने या जहाज को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।
इससे पहले ब्रिटिश सेना ने भी बताया था कि ईरान की दो गनबोट्स ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक टैंकर पर फायरिंग की। UK Maritime Trade Operations (UKMTO) ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जहाज और उसका चालक दल सुरक्षित हैं।
अमेरिका को ईरान की चेतावनी
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरानी नौसेना अपने दुश्मनों को “नयी कड़वी हार” देने के लिए तैयार है।
टेलीग्राम पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना पूरी तरह तैयार है। गौरतलब है कि 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और आधिकारिक माध्यमों से ही देश को संबोधित कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं, खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जो तेल आयात के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर हैं।
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