भारत ने अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहा, तेहरान ने दिल्ली से साधा संपर्क

ईरान में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने बुधवार को अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की और देश की यात्रा से भी परहेज करने की सलाह दी। यह कदम तेहरान द्वारा देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई, जिसमें करीब 2,000 लोगों की मौत की खबर है, और अमेरिका की संभावित सैन्य दखलअंदाजी की आशंकाओं के मद्देनज़र उठाया..

भारत ने अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहा, तेहरान ने दिल्ली से साधा संपर्क
15-01-2026 - 12:06 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। ईरान में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने बुधवार को अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की और देश की यात्रा से भी परहेज करने की सलाह दी। यह कदम तेहरान द्वारा देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई, जिसमें करीब 2,000 लोगों की मौत की खबर है, और अमेरिका की संभावित सैन्य दखलअंदाजी की आशंकाओं के मद्देनज़र उठाया गया। इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी एक परामर्श में ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों—जिनमें छात्र, कारोबारी, तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल हैं..से कहा गया है कि वे “तेजी से बदलती स्थितिको देखते हुए व्यावसायिक उड़ानों समेत उपलब्ध सभी साधनों से देश छोड़ दें।

इसके अलावा, नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने एक अलग परामर्श जारी कर भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक ईरान की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी। यह 5 जनवरी को जारी की गई पहले की एडवाइजरी की पुनरावृत्ति है, जिसमें ईरान में रह रहे भारतीयों से सावधानी बरतने और प्रदर्शनों या रैलियों से दूर रहने को कहा गया था।

ईरान में इस समय लगभग 10,000 भारतीय मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं। इसके अलावा हर साल भारत के विभिन्न हिस्सों से हजारों शिया तीर्थयात्री भी ईरान जाते हैं।

ये परामर्श ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते हैं तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को यह कहकर प्रोत्साहित भी किया है कि “मदद रास्ते में हैऔर चेतावनी दी है कि यदि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो “बहुत कड़ी कार्रवाईकी जाएगी।

शाम को विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्हें “ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का फोन आया।” उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि दोनों नेताओं ने “ईरान और उसके आसपास की बदलती स्थितिपर चर्चा की, हालांकि उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।

मामले से परिचित लोगों के अनुसार, यह फोन कॉल अरागची के लिए 15 जनवरी से प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा रद्द करने के फैसले को स्पष्ट करने का भी एक अवसर था। ईरान की ओर से बातचीत पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया और इंटरनेट बंद होने के कारण ईरानी सरकार की अधिकांश आधिकारिक वेबसाइटें भी उपलब्ध नहीं थीं।

दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत भारत द्वारा अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने और वहां की यात्रा से बचने की सलाह दिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। ईरान में करीब 10,000 भारतीय मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र हैं।

ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को लेकर भारत पर एक बार फिर दबाव बढ़ा है, खासकर ट्रंप द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद। हालांकि भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया है कि इसका असर “न्यूनतमरहने की उम्मीद है, क्योंकि भारत-ईरान व्यापार करीब 1.68 अरब डॉलर का है, जो भारत के कुल व्यापार का केवल 0.15% है।

भारतीय दूतावास की एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से सतर्क रहने, प्रदर्शन क्षेत्रों से दूर रहने, स्थानीय मीडिया पर नजर रखने और तेहरान स्थित मिशन के संपर्क में रहने को कहा गया है। भारतीय नागरिकों को अपने यात्रा और आव्रजन दस्तावेज, जैसे पासपोर्ट, हमेशा तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं, रेजिडेंट वीजा पर ईरान में रह रहे भारतीयों को दूतावास में पंजीकरण कराने की भी सलाह दी गई है।

हालांकि, ईरान से भारतीय नागरिकों की तत्काल निकासी (एवैक्यूएशन) को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि स्थिति के तेजी से बदलने को देखते हुए अधिकारी हर संभावित परिदृश्य के लिए तैयारी कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में विरोध-प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जो देश के इतिहास के सबसे गंभीर दमन अभियानों में से एक मानी जा रही है। ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए थे, जहां ईरानी रियाल के रिकॉर्ड स्तर तक गिरने के खिलाफ विरोध हुआ। बाद में यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया। मुद्रा के अवमूल्यन के पीछे भीषण जल संकट, बिजली कटौती, बढ़ती बेरोजगारी और बेलगाम महंगाई जैसी समस्याएं भी रही हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।