भारत के ऑटो निर्यात में तेज़ उछाल, लेकिन ऊंची लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कर रही कमजोर: नीति आयोग
नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण क्लस्टरों से बंदरगाहों तक परिवहन में अक्षमताएं मुनाफे को कम कर रही हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत की स्थिति को कमजोर कर रही हैं। यह आकलन ऐसे समय आया है जब सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को यात्री वाहनों से लेकर वाणिज्यिक वाहनों तक के निर्यात में शानदार प्रदर्शन दर्ज ..
नयी दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल निर्यात में तेज़ बढ़ोतरी के बावजूद, ऊंची लॉजिस्टिक्स लागत—चाहे वह देश के भीतर की हो या बंदरगाहों से जुड़ी—अब भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण क्लस्टरों से बंदरगाहों तक परिवहन में अक्षमताएं मुनाफे को कम कर रही हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत की स्थिति को कमजोर कर रही हैं। यह आकलन ऐसे समय आया है जब सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को यात्री वाहनों से लेकर वाणिज्यिक वाहनों तक के निर्यात में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया गया।
नीति आयोग के अनुसार, भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात एक व्यापक वैश्विक दायरे में फैला है, जिसमें जापान, मेक्सिको और अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के कई बाजार प्रमुख गंतव्य हैं। वैश्विक ऑटोमोबाइल मांग में यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) की हिस्सेदारी लगभग 71 प्रतिशत है, जिसमें भारत ने करीब 1 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।
पवन गोयनका, SIAM के पूर्व अध्यक्ष और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की SCALE (Advancing Local Value-add & Exports) स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन, बताते हैं कि पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात सालाना लगभग 20 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक है।
उन्होंने कहा, “मेरा विज़न है कि हमारे कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत निर्यात में जाए। ऑटो उद्योग का महत्व सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि इसके आर्थिक योगदान, उन्नत विनिर्माण और सबसे मजबूत एमएसएमई इकोसिस्टम में भी है।”
वैश्विक आकर्षण
अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक मजबूत पहुंच के प्रयासों के चलते, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में भारत के यात्री वाहनों का अब तक का सबसे अधिक निर्यात दर्ज किया गया। SIAM के अनुसार, इस दौरान 2.25 लाख यूनिट का निर्यात हुआ, जो 2024-25 की Q3 की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है।
इसके अलावा, जनवरी–दिसंबर 2025 के दौरान यात्री वाहनों का कुल निर्यात 8.63 लाख यूनिट रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16 प्रतिशत की वृद्धि है। मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित अधिकांश बाजारों में मांग स्थिर बनी हुई है।
तीन-पहिया वाहनों के निर्यात में भी जोरदार बढ़त देखने को मिली। 2025-26 की Q3 में तीन-पहिया वाहनों का निर्यात करीब 1.27 लाख यूनिट रहा, जो पिछले साल की Q3 की तुलना में 70.1 प्रतिशत की वृद्धि है।
कैलेंडर वर्ष जनवरी–दिसंबर 2025 में तीन-पहिया वाहनों का निर्यात 4.26 लाख यूनिट तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 42.7 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसमें श्रीलंका और अफ्रीकी देशों
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