मध्यस्थ बने पाकिस्तान को ईरान दी दो टूक शर्तें, अमेरिका से सीधी वार्ता से पहले शहबाज और असीम मुनीर पर बढ़ा मध्यस्थता के काम का भारी दबाव
अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से पहले ईरान ने कथित तौर पर मध्यस्थ पाकिस्तान को अपनी “रेड लाइन” (अपरिवर्तनीय शर्तें) बता दी हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता शुरू होने से पहले ये शर्तें सामने आई..
अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से पहले ईरान ने कथित तौर पर मध्यस्थ पाकिस्तान को अपनी “रेड लाइन” (अपरिवर्तनीय शर्तें) बता दी हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता शुरू होने से पहले ये शर्तें सामने आई हैं।
दोनों पक्षों के बीच युद्ध को समाप्त करने और स्थायी शांति की दिशा में समाधान खोजने के लिए दो सप्ताह के संघर्षविराम (ट्रूस) पर सहमति बनी है। इसी के तहत ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि, आमने-सामने की बातचीत से पहले ही दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी शर्तें और दबाव की रणनीति स्पष्ट कर दी है।
इस्लामाबाद में बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन ईरान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को अपनी चार प्रमुख “रेड लाइन” बता दी हैं। ये शर्तें इस प्रकार हैं:
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास ही रहेगा।
- ईरान को युद्ध के लिए मुआवजा (war reparations) दिया जाएगा।
- अमेरिका द्वारा जमे हुए ईरानी फंड (frozen assets) को जारी किया जाएगा।
- ईरान से जुड़े सभी क्षेत्रों—जिसमें लेबनान भी शामिल है—में स्थायी संघर्षविराम सुनिश्चित किया जाएगा।
हालांकि ईरान ने अपनी शर्तें पाकिस्तान को बता दी हैं, लेकिन इन मांगों पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खासतौर पर “जमे हुए ईरानी फंड” को लेकर White House ने संकेत दिया है कि इन संपत्तियों को जारी करने पर अभी सहमति नहीं बनी है, जबकि ईरानी सरकारी मीडिया में इसको लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
इन परिस्थितियों में पाकिस्तान—विशेष रूप से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर—पर इस संवेदनशील मध्यस्थता को सफल बनाने का दबाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।
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