ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद कच्चे तेल में ऐतिहासिक गिरावट, एक दिन में 20% तक लुढ़के दाम
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच Iran और United States के बीच युद्धविराम की घोषणा होते ही वैश्विक तेल बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 20% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट मानी ..
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच Iran और United States के बीच युद्धविराम की घोषणा होते ही वैश्विक तेल बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 20% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट मानी जा रही है।
तेल की कीमतें सत्र के उच्च स्तर 117.63 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 91.05 डॉलर तक पहुंच गईं। यानी कुछ ही घंटों में करीब 26 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट COVID-19 pandemic market crash के दौरान अप्रैल 2020 में देखी गई थी, जब वैश्विक मांग अचानक खत्म हो गई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना गिरावट का केंद्र
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता का खत्म होना है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट पॉइंट्स में से एक है, जहां से प्रतिदिन लगभग 20% वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है।
पिछले 40 दिनों से जारी तनाव के दौरान ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद या बाधित करने की धमकियों ने वैश्विक सप्लाई को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। इससे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी।
युद्धविराम से खत्म हुआ ‘वॉर प्रीमियम’
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के खतरे के कारण तेल की कीमतों में जो “वॉर प्रीमियम” जुड़ गया था, वह युद्धविराम की घोषणा के साथ ही खत्म हो गया। इसी वजह से कीमतों में इतनी तेज गिरावट आई।
वैश्विक बाजारों पर असर
इस गिरावट से वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिली है। कई देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत है, खासकर उन देशों के लिए जो कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं, क्योंकि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है।
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