ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का 86 वर्ष की आयु में निधन, विवादों से भरी विरासत छोड़ गए

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई, जिन्होंने 1989 से देश का नेतृत्व किया, का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका शासन धार्मिक सत्ता के केंद्रीकरण, इज़रायल और अमेरिका के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर टकराव, और देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने के लिए जाना..

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का 86 वर्ष की आयु में निधन, विवादों से भरी विरासत छोड़ गए
01-03-2026 - 10:34 AM

दुबई। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई, जिन्होंने 1989 से देश का नेतृत्व किया, का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका शासन धार्मिक सत्ता के केंद्रीकरण, इज़रायल और अमेरिका के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर टकराव, और देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने के लिए जाना जाता है।

ख़ामेनेई के निधन की घोषणा रविवार तड़के ईरान के सरकारी मीडिया के माध्यम से की गई। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब इज़रायल और अमेरिका की ओर से एक बड़े सैन्य अभियान की जानकारी सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि ख़ामेनेई इस संयुक्त कार्रवाई में मारे गए।

ख़ामेनेई का नेतृत्व और विरासत

अयातुल्लाह रुहोल्लाह ख़ोमैनी के निधन के बाद सत्ता संभालने वाले ख़ामेनेई ने इस्लामिक रिपब्लिक को एक प्रभावशाली क्षेत्रीय शक्ति में बदल दिया। उन्होंने शिया मौलवी वर्ग के प्रभाव को विस्तार दिया और अर्धसैनिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मजबूत किया, जो आगे चलकर सैन्य और आर्थिक दोनों क्षेत्रों में एक प्रभुत्वशाली ताकत बन गया।

हालाँकि उनके हाथ में व्यापक सत्ता थी लेकिन आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन के चलते उन्हें बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद गुस्सा भड़क उठा। सख्त ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोप में हिरासत में ली गई अमीनी की मौत ने देशभर में विरोध की लहर पैदा कर दी, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों ने ख़ामेनेई को हटाने की खुली मांग की।

क्षेत्रीय और वैश्विक संघर्ष

ख़ामेनेई के कार्यकाल में ईरान कई क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल रहा, खासकर अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इज़रायल पर किए गए हमले के बाद। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और इज़रायल तथा ईरान के बीच सीधे टकराव देखने को मिले। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले भी शामिल रहे।

तनाव बढ़ने के साथ ही ख़ामेनेई की रणनीतियों पर सवाल उठने लगे, खासकर तब जब रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका उनके सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखने में और अधिक निर्णायक होती चली गई, जबकि आम जनता के बीच असंतोष बढ़ता रहा।

ईरान का भविष्य

ख़ामेनेई के निधन से ईरान के भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। 88 सदस्यों वाली ‘एक्सपर्ट्स असेंबली’, जिसमें अधिकतर कट्टरपंथी मौलवी शामिल हैं, उनके उत्तराधिकारी का चयन करेगी। लेकिन किसी स्पष्ट उम्मीदवार के अभाव ने सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को जटिल बना दिया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ख़ामेनेई की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी जनता से “अपनी सरकार को वापस हासिल करने का अवसर” भुनाने का आह्वान किया। आने वाले समय में देश की राजनीतिक दिशा तय करने में रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

ख़ामेनेई की पृष्ठभूमि

मशहद में जन्मे ख़ामेनेई शाह विरोधी आंदोलन से जुड़े रहे और इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना के दौर में एक अहम चेहरा बने। भले ही उनमें ख़ोमैनी जैसी करिश्माई अपील नहीं थी, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे सत्ता को अपने हाथ में समेट लिया और तीन दशकों से अधिक समय तक शासन किया।

उनका शासन मौलवियों और सरकारी एजेंसियों की बढ़ती नौकरशाही, तथा असंतोष को दबाने के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड पर निर्भरता के लिए जाना जाता है।

परमाणु महत्वाकांक्षा और अंतरराष्ट्रीय रिश्ते

ख़ामेनेई ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कट्टर समर्थक रहे और अमेरिका को अक्सर “ग्रेट सैटन” कहा करते थे। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने के बाद उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में आ गई।

बातचीत के बावजूद ईरान की परमाणु गतिविधियाँ आगे बढ़ती रहीं, जिससे उसके परमाणु हथियार विकसित करने की आशंका गहराती गई। ख़ामेनेई का रुख स्पष्ट रहा, वे शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अधिकार पर जोर देते रहे लेकिन परमाणु हथियारों की निंदा करते रहे।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता

ख़ामेनेई का शासन व्यापक राजनीतिक अशांति से भी घिरा रहा। 1990 के दशक के अंत में सुधारवादी आंदोलनों और 2009 के विवादित चुनावों के बाद हुए बड़े प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा।

आर्थिक बदहाली और सरकारी दमन के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ता गया और 2022 2025 में हुए बड़े प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने खुलकर इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की मांग की।

अमेरिका के साथ टकराव

ख़ामेनेई का नेतृत्व अमेरिका के साथ बेहद तनावपूर्ण रिश्तों के दौर में रहा, खासकर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान। 2020 में जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद हालात चरम पर पहुँच गए और बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाएँ पैदा हो गईं।

तेज़ी से बढ़ते तनाव के बावजूद, ख़ामेनेई की सरकार अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं को साधने की कोशिश करती रही लेकिन संबंध सुधारने या स्थायी समझौते हासिल करने में उसे सीमित सफलता ही मिली।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।