पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में गहराता मानवीय संकट: दमन, महंगाई और बिजली संकट से बढ़ा असंतोष
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की कमी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट ने मिलकर गंभीर मानवीय संकट पैदा..
नयी दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की कमी, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट ने मिलकर गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है।
यूके आधारित अखबार Asian Lite की रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं और छात्रों की बढ़ती भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शनों से साफ है कि लोगों में असंतोष गहराता जा रहा है, जो लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा का परिणाम है।
बढ़ता विरोध और प्रशासनिक सख्ती
रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan-occupied Kashmir और Gilgit-Baltistan में विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और प्रशासन की ओर से सख्ती भी बढ़ती जा रही है।
लोग सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि बिजली की भारी कमी और महंगे बिलों से भी परेशान हैं। विडंबना यह है कि इन क्षेत्रों में बड़े जलविद्युत परियोजनाएं होने के बावजूद स्थानीय लोगों को लंबे समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ती है और उन्हें व्यावसायिक दरों पर बिजली दी जाती है।
बिजली बिल और नागरिक अधिकार बना बड़ा मुद्दा
PoJK में विरोध प्रदर्शन क्षेत्रव्यापी बंद में बदल गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने महंगे बिजली बिल, वेतन बकाया और नागरिक अधिकारों में कमी का हवाला देते हुए बिल भरने से इनकार कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासन की प्रतिक्रिया में गिरफ्तारियां, संचार बंद करना और बल प्रयोग जैसी कार्रवाइयां शामिल रही हैं।
जमीन का मुद्दा बना फ्लैशपॉइंट
Gilgit-Baltistan में जमीन के अधिकार को लेकर विवाद गहरा गया है। बड़ी मात्रा में जमीन को “राज्य संपत्ति” घोषित कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकार खत्म हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक परियोजनाओं के नाम पर जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
संसाधनों के दोहन से बढ़ा अविश्वास
रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में पैदा होने वाली बिजली पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड में भेजी जाती है, जबकि स्थानीय लोग बिजली की कमी और महंगे टैरिफ से जूझते हैं। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि क्षेत्रीय संसाधनों का इस्तेमाल बाहरी हितों के लिए किया जा रहा है।
दमन के आरोप और अंतरराष्ट्रीय चिंता
आलोचकों का कहना है कि Inter-Services Intelligence जैसी एजेंसियां समस्याओं के समाधान के बजाय विरोध को दबाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
रिपोर्ट में निगरानी, धमकी और जबरन गायब किए जाने (enforced disappearances) जैसे गंभीर आरोपों का भी जिक्र किया गया है।
यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठने लगा है। 2025 में United Nations Human Rights Council के जिनेवा सत्र के दौरान PoJK और PoGB के कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध पर प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई थी।
पाकिस्तान का रुख
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अक्सर विरोध प्रदर्शनों को “बाहरी साजिश” करार दिया है। हालांकि, स्थानीय लोग इसे अपनी वास्तविक आर्थिक और मानवीय समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश मानते हैं।
कुल मिलाकर, PoJK और गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां प्रशासनिक उपेक्षा, संसाधनों के असमान उपयोग और दमनात्मक नीतियों ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
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