कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने पर होने वाली आलोचना के बाद ईरानी दूतावास ने ‘कश्मीर-भारत’ वाले ट्वीट हटाए
भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत और “कश्मीर के लोगों” का धन्यवाद करने वाले कई पोस्ट अचानक हटा दिए। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब खासतौर पर पाकिस्तान-आधारित यूज़र्स ने कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने पर कड़ी आपत्ति..
नयी दिल्ली। भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत और “कश्मीर के लोगों” का धन्यवाद करने वाले कई पोस्ट अचानक हटा दिए। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब खासतौर पर पाकिस्तान-आधारित यूज़र्स ने कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने पर कड़ी आपत्ति जताई।
हटाए गए पोस्ट में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया गया था। बाद में दूतावास ने ईरानी सरकारी मीडिया की उन पोस्ट्स को शेयर किया, जिनमें केवल “कश्मीरियों” का जिक्र था, भारत का नहीं।
एक पोस्ट, जिसे कुछ ही समय बाद डिलीट कर दिया गया, में लिखा था, “हम कश्मीर के दयालु लोगों का दिल से धन्यवाद करते हैं… यह दयालुता कभी नहीं भुलाई जाएगी। धन्यवाद, भारत।”
एक अन्य पोस्ट में कश्मीर की एक महिला का जिक्र था, जिसने अपने दिवंगत पति की याद में रखा सोना दान कर दिया। पोस्ट के अंत में लिखा था, “धन्यवाद #Kashmir। धन्यवाद #India।”
बाद में इसी वीडियो को दोबारा साझा किया गया लेकिन इस बार कैप्शन छोटा कर दिया गया और भारत या कश्मीर का कोई उल्लेख नहीं किया गया। केवल लिखा गया, “हम आपकी दयालुता कभी नहीं भूलेंगे।”
ट्वीट हटाए जाने के बाद दोनों पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पाकिस्तान-आधारित कुछ यूज़र्स ने कहा कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसे भारत का हिस्सा बताना गलत है।
वहीं, भारतीय यूज़र्स ने पोस्ट हटाने के फैसले पर सवाल उठाए और कुछ ने विदेश मंत्रालय (MEA) से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
यह घटनाक्रम भारत और ईरान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से चली आ रही संवेदनशीलता के बीच सामने आया है। भारत का रुख स्पष्ट है कि पूरा कश्मीर उसका अभिन्न हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर का मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत के दायरे में आता है।
पिछले एक महीने में कश्मीर क्षेत्र से ईरान के लिए मानवीय सहायता—नकद और आभूषण के रूप में—काफी बढ़ी है, खासकर स्थानीय शिया मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों में।
साल 2019 में, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया था, तब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने वहां के मुसलमानों की स्थिति पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में भारत ने तत्कालीन ईरानी राजदूत अली चेगेनी को तलब किया था।
इसके बाद 2020 में खामेनेई ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों पर टिप्पणी की और 2024 में ‘उम्मा के दमन’ का जिक्र करते हुए भारत के मुसलमानों का उल्लेख किया। इन सबके बावजूद भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंध बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है। उन्होंने तनाव कम करने की अपील की और नागरिकों के साथ-साथ ऊर्जा एवं परिवहन ढांचे पर हमलों का कड़ा विरोध किया।
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