शाहपुर कंडी डैम मार्च तक पूरा होगा, पाकिस्तान को रावि का अतिरिक्त पानी जाना रुकेगा: मंत्री जावेद अहमद राणा
जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री Javed Ahmed Rana ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश की पंजाब सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी डैम 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही रावि नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की ओर बहना बंद हो..
जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री Javed Ahmed Rana ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश की पंजाब सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी डैम 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही रावि नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की ओर बहना बंद हो जाएगा।
एक टीवी चैनल के सवाल पर मंत्री राणा ने कहा, “हां, पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा। इसे रोका जाना चाहिए।” उन्होंने बताया कि कठुआ और सांबा जिले सूखा प्रभावित हैं और यह परियोजना कंडी क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्राथमिकता पर बनाई जा रही है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद तेज हुई रफ्तार
22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले, जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय गाइड की मौत हुई थी, के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदमों की घोषणा की थी। इनमें 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला भी शामिल था।
प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद जम्मू क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं की रफ्तार तेज की गई, ताकि नदी जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। शाहपुर कंडी बैराज जो एक राष्ट्रीय परियोजना है, को चार दशक बाद प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से संशोधित किया गया।
चेनाब पर चार परियोजनाएं, 2027-28 तक कमीशनिंग
पहलगाम हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर चल रही चार जलविद्युत परियोजनाओं पर लगातार प्रगति हुई है। इनके 2027-28 तक चालू होने की संभावना है।
सिंधु जल संधि और जल बंटवारा
विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी सिंधु जल संधि के तहत छह नदियों का बंटवारा किया गया था—
- पूर्वी नदियां (रावि, ब्यास, सतलुज): भारत को
- पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चेनाब): पाकिस्तान को
भारत को पश्चिमी नदियों के जल का सीमित, गैर-उपभोग उपयोग की अनुमति थी।
परियोजना के लाभ और वित्तीय मंजूरी
6 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने शाहपुर कंडी परियोजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। सिंचाई घटक के लिए ₹485.38 करोड़ की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई।
परियोजना पूरी होने पर—
- पंजाब: 5,000 हेक्टेयर
- जम्मू-कश्मीर (कठुआ व सांबा): 32,173 हेक्टेयर
क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी।
पंजाब के साथ सहयोग में परियोजना के क्रियान्वयन से माधोपुर हेडवर्क्स के जरिए पाकिस्तान की ओर बहने वाला रवि का पानी न्यूनतम किया जा सकेगा। साथ ही, पंजाब में 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दी जाने वाली सिंचाई जल आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। परियोजना के पूरा होने पर पंजाब 206 मेगावाट जलविद्युत भी पैदा कर सकेगा।
दशकों पुरानी परियोजना
यह परियोजना कई दशकों पुरानी है। 1979 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत रंजीत सागर डैम (थीन डैम) और शाहपुर कंडी डैम का निर्माण पंजाब को करना था।
- 1995: तत्कालीन प्रधानमंत्री P. V. Narasimha Rao ने शिलान्यास किया
- 2001: योजना आयोग से स्वीकृति
- 2009: संशोधित लागत को केंद्र की मंजूरी
- फरवरी 2008: केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया
हालांकि, पंजाब में बिजली घटक के लिए धन की कमी और अंतर-राज्यीय विवादों के कारण काम रुका रहा। 2018 में दिल्ली में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच समझौते के बाद परियोजना ने गति पकड़ी।
बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में 80 किमी रावि नहर और 492.5 किमी वितरण नेटवर्क पहले ही बन चुका था लेकिन बैराज पूरा न होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब परियोजना के पूर्ण होने से इन संरचनाओं का लाभ जमीन पर दिखने की उम्मीद है।
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